माता पिता की अपेक्षाओं के बोझ तले दबे बचपन के बीच यह सवाल आज ज्यादा मौजूद हो जाता है कि क्या आज की पीढ़ी हरफनमौला बनने के चक्कर में कुछ नहीं बन पाएगी? स्कूल जाने के साथ ही मां बाप की अपेक्षाएं भी बच्चे के साथ बड़ी होने लगती हैं।
वह स्कूल से घर लौटता है तो उसे ट्यूशन के लिए भेज दिया जाता है। वहां से घर वापसी होती है तो फिर कम्प्यूटर क्लास, डांस क्लास, कराटे क्लास, एक्स्ट्रा करकुलर एक्टिविटीज में उसे बिजी कर दिया जाता है ताकि इधर उधर दिमाग लगाने के बजाय कुछ 'अच्छी चीजें' सीख सके।
वर्तमान पीढ़ी में पैदा होने वाले बच्चों पर पहले के मुकाबले माता पिता की अपेक्षाओं का बोझ ज्यादा होता है, और इन्हीं अपेक्षाओं के बीच उस पर दबाव रहता है हरफनमौला बनने का। एक ऐसा आलराउंडर जो पढ़ाई में टॉप करने के अलावा खेलों और अन्य इम्तिहानों में भी अव्वल रहे।
इस विषय पर अमर उजाला डॉट.कॉम ने पोल कराया और पाठकों से सवाल पूछा कि 'क्या आज की पीढ़ी हरफनमौला बनने के चक्कर में कुछ नहीं बन पाएगी? सवाल के जवाब में पाठकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
कुल 6699 पाठकों ने पोल में हिस्सा लिया। 70.17 फीसदी (4701 वोट) ने माना कि हरफनमौला बनने के चक्कर में आज की पीढ़ी कुछ नहीं बन पाएगी। जबकि 22.14 फीसदी पाठक (1483 वोट) ने माना ऐसा नहीं है। वहीं, 7.69 फीसदी (515 वोट) पाठकों ने कह नहीं सकते विकल्प को चुना।