बहुजन समाज पार्टी ने उत्तर प्रदेश में दो सीटों पर होने वाले उपचुनाव में समाजवादी पार्टी को समर्थन देने का ऐलान किया है। इस ऐलान के बाद सपा बसपा में चली आ रही 23 साल की दुश्मनी दोस्ती में बदल गई।
जाानकारी के मुताबिक 1 मार्च को मायावती ने फूलपुर और गोरखपुर के बसपा कोऑर्डिनेटर को फोन किया और वहां की जनता का मूड जानने की कोशिश की। इसके बाद 2 मार्च को बसपा कोऑर्डिनेटर ने ऐसे उम्मीदवार को सपोर्ट करने का ऐलान किया जो इन सीटों पर भाजपा को हरा सके। वहीं 3 मार्च को सपा प्रवक्ता पंखुड़ी पाठक ने ट्वीट करके सपा-बसपा गठबंधन की जानकारी दी।
विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि बसपा सुप्रीमो ने इस घोषणा के साथ 2019 के लिए भी नए सियासी समीकरण की नींव रख दी है। फूलपुर लोकसभा क्षेत्र में कुल 19 लाख 37 हजार से अधिक मतदाता हैं। इनमें पटेल, ब्राह्मण, मुसलमान और दलित मतदाताओं की संख्या तकरीबन तीन-तीन लाख है।
इस विषय पर अमर उजाला डॉट.कॉम ने पोल कराया और पाठकों से सवाल पूछा कि 'क्या यूपी उपचुनावों के लिए बसपा-सपा का गठजोड़ 2019 तक बना रह सकेगा?'
सवाल के जवाब में पाठकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। कुल 3990 पाठकों ने पोल में हिस्सा लिया। 47.34 फीसदी (1889 वोट) ने माना कि यूपी उपचुनावों के लिए बसपा-सपा का गठजोड़ 2019 तक बना रह सकेगा। जबकि 52.66 फीसदी (2101) पाठकों ने माना कि यूपी उपचुनावों के लिए बसपा-सपा का गठजोड़ 2019 तक नहीं बना रह सकेगा।