बीते दिनों केंद्र सरकार ने उच्चतम न्यायालय को सूचित किया कि देशभर में अदालती कार्यवाही का सीधा प्रसारण किया जा सकता है। इस मामले में प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति एएम खानविलकर और न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड़ की तीन सदस्यीय खंडपीठ ने सभी पक्षकारों से कहा कि वे अदालत की कार्यवाही के सीधे प्रसारण के लिए दिशा-निर्देश तैयार करने के बारे में अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल को अपने सुझाव दें।
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट तीन मई को न्यायिक कार्यवाही के सीधा प्रसारण, वीडियो रिकॉर्डिंग या लिप्यांतरण के बारे में केन्द्र सरकार से जवाब मांगा था। अटार्नी जनरल ने इससे पहले न्यायालय से कहा था कि अदालती कार्यवाही का सीधा प्रसारण दुनिया के अनेक देशों में एक स्वीकार्य परंपरा है। शीर्ष अदालत ने न्यायिक कार्यवाही में पारदर्शिता लाने के इरादे से पिछले साल प्रत्येक राज्य की निचली अदालतों और न्यायाधिकरणों में सीसीटीवी लगाने का निर्देश दिया था।
इसी विषय पर अमर उजाला डॉट कॉम ने ऑनलाइन पोल में अपने पाठकों से सवाल पूछा था 'क्या इस जीत ने यह साबित कर दिया है कि विकास ही देश का सबसे बड़ा मुद्दा है?'
पोल के जवाब में हमें कुल 2,996 वोट मिले। इनमें 84.08 फीसदी (2,519 वोट) पाठकों ने माना कि अदालती कार्यवाही के सीधे प्रसारण से पूरी न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी, जबकि 15.92 फीसदी (477 वोट) पाठकों ने सवाल के जवाब में असहमति जताते हुए कहा कि अदालती कार्यवाही के सीधे प्रसारण के बावजूद न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं आएगी।