क्रिकेट को दुनिया में ऊंचाई देने वाला भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) अपनी कमाई और खर्च से अंतरराष्ट्रीय लोकप्रियता हासिल कर चुका है। ऐसे में भारतीय क्रिकेट को रोमांचित करने वाला ये बोर्ड दुनिया भर में अपने प्रशासनिक ताकत के लिए जाना जाता है। ना सिर्फ भारतीय क्रिकेट बल्कि दुनिया में बीसीसीआई अपनी संस्थात्मक मजबूती का उदाहरण है।
ऐसे में गुरुवार को अमर उजाला डॉट कॉम द्वारा पूछे गए सवाल 'क्या भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) को सूचना का अधिकार कानून के अंतर्गत लाना सही है?' पर पाठकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इस सवाल पर 2,155 पाठकों ने अपनी राय हमें भेजी है। लेकिन ये बात साफ है कि लोग चाहते हैं कि बोर्ड को RTI के दायरे में रखने की जरूरत है। 91.09% लोगों ने पूछे गए इस सवाल पर अपना उत्तर हां में दिया है। वहीं 8.91% लोगों का विश्वास बीसीसीआई को स्वतंत्र रखने में है।
बता दें कि विधि आयोग ने गुरुवार को कहा था कि भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड (बीसीसीआई) को सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून के दायरे में लाया जाना चाहिए। आयोग ने स्पष्ट करते हुए कहा था कि यह लोक प्राधिकार की परिभाषा में आता है और इसे सरकार से अच्छा खासा वित्तीय लाभ मिलता है।
वहीं उच्चतम न्यायालय ने जुलाई 2016 में आयोग से इस बारे में सिफारिश करने के लिये कहा था कि क्रिकेट बोर्ड को सूचना का अधिकार कानून के तहत लाया जा सकता है या नहीं। पारदर्शिता लाने के लिए क्रिकेट बोर्ड को आरटीआई के तहत लाने की लंबे वक्त से मांग होती रही है।
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