आर्मी चीफ जनरल बिपिन रावत ने बुधवार को राजधानी में उत्तर पूर्व में सीमा सुरक्षा को लेकर हुए एक सेमिनार में एक राजनीतिक संगठन का जिक्र कर किया जिस पर विवाद गरमा गया।
पड़ोसी देशों की ओर इशारा करते हुए कहा कि जिस तरह कश्मीर में अशांति फैलाने के लिए आतंकवादी भेजे जाते हैं। उसी तरह नार्थ ईस्ट में अशांति फैलाने के लिए अवैध आबादी को भारत में भेजा जाता है।
इसके पीछे सेना प्रमुख ने वोट बैंक की राजनीति को दोषी बताया। उन्होंने कहा कि नार्थ ईस्ट में AIUDF नाम का राजनीतिक संगठन विकास कर रहा है।
इस पार्टी का विकास बीजेपी के मुकाबले तेज हुआ है। उन्होंने कहा कि जनसंघ का आज तक का जो सफर रहा है उसके मुकाबले एआईयूडीएफ का विकास तेजी से हुआ है। गौर हो कि एआईयूडीएफ (ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट) नाम का संगठन मुस्लिमों की आवाज उठाता है।
इस विषय पर अमर उजाला डॉट.कॉम ने पोल कराया और पाठकों से सवाल पूछा कि 'क्या सेना प्रमुख जैसे महत्वपूर्ण व्यक्ति को देश की राजनीति में दखल देना चाहिए?' सवाल के जवाब में पाठकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
कुल 3387 पाठकों ने पोल में हिस्सा लिया। 43.46 फीसदी (1472 वोट) ने माना कि सेना प्रमुख जैसे महत्वपूर्ण व्यक्ति को देश की राजनीति में दखल देना चाहिए। जबकि 56.54 फीसदी (1915) पाठकों ने सेना प्रमुख जैसे महत्वपूर्ण व्यक्ति को देश की राजनीति में दखल नहीं देना चाहिए।