समाजवादी पार्टी में उठे भूचाल के बीच हुए आपातकालीन राष्ट्रीय अधिवेशन में कई बड़े फैसले लिए गए। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बन गए, जबकि सपा सुप्रीमो रहे मुलायम सिंह यादव को पार्टी का संरक्षक बना दिया गया। चाचा-भतीजे के बीच छिड़ी लड़ाई का भी सच सामने आया जब शिवपाल सिंह यादव को पार्टी से निकाल दिया गया।
इतना ही नहीं अमर सिंह को भी पार्टी से निकाल दिया गया। इन फैसलों से एक बार फिर से पार्टी में भूचाल आ गया है। राष्ट्रीय अधिवेशन में पार्टी के वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव ये प्रस्ताव लाए, जिसे सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया। गौरतलब है कि मुलायम की चेतावनी के बावजूद पार्टी के बड़े नेता अधिवेशन में शामिल हुए।
सपा में उठे इस भूचाल के बाद ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि इन सब की वजह से पार्टी को विधानसभा चुनाव में नुकसान भी झेलना पड़ सकता है। इसी विषय पर अमर उजाला डॉट कॉम ने ऑनलाइन पोल किया। पोल में सवाल पूछा, 'मौजूदा स्थिति में अखिलेश यादव के लिए सबसे बेहतर विकल्प क्या है?' सवाल के जवाब में पाठकों से पूछा गया कि अखिलेश को मुलायम से सुलह कर लेनी चाहिए, अलग पार्टी बनानी चाहिए या फिर पार्टी बदलनी चाहिए।
पोल में कुल 10016 पाठकों ने पोल में हिस्सा लिया। सबसे अधिक 48.37 फीसदी यानि 4,845 पाठकों का मानना है कि अखिलेश को मुलायम से सुलह कर लेनी चाहिए। 44.62 फीसदी यानि 4,469 पाठकों ने माना कि अखिलेश को अलग पार्टी बनानी चाहिए। वहीं 7.01 फीसदी यानि 702 पाठकों ने माना कि अखिलेश को पर्टी बदल लेनी चाहिए।