समाजवादी पार्टी में उठे सियासी बवंडर में नया मोड़ आ गया है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने दो तिहाई सांसदों, तीन चौथाई से ज्यादा विधायकों और इतने ही प्रतिनिधियों के शपथ पत्र को चुनाव आयोग में दाखिल कर अपना दबदबा कायम कर दिया।
इतना ही नहीं सपा के संस्थापक मुलायम सिंह यादव के नजदीकी भी अखिलेश के गुट में शामिल हो गए हैं। भले ही ये साइकिल का चिह्न किसके पास रहेगा। इसका फैसला बाद में हो, लेकिन कार्यकर्ताओं और नेताओं में इसका फैसला हो गया है। जहां अधिकतर विधायक अखिलेश के साथ है वहीं 24 से 15 सांसद भी उनके सपोर्ट में हैं।
अखिलेश गुट ने 4700 से ज्यादा डेलीगेट्स के हलफनामे दाखिल करके निचले स्तर पर पार्टी की पकड़ साबित की है। बता दें कि चिह्न की लड़ाई दिन प्रतिदिन गरमा रही है। इसी पर अमर उजाला डॉट कॉम ने पोल किया। पोल में सवाल पूछा गया, कि क्या समाजवादी पार्टी और साइकिल चुनाव चिह्न पर अखिलेश का दावा करना उचित है?
कुल 10,021 पाठकों ने पोल में हिस्सा लिया। सबसे अधिक 66.75 फीसदी यानि 6,689 पाठकों ने माना कि अखिलेश एक सुलझे हुए नेता हैं और उनका सपा और चिह्न पर दावा करना उचित है। वहीं 30.25 फीसदी यानि 3,031 पाठकों ने माना कि अखिलेश को मुलायम सिंह के निर्देशों का पालन करना चाहिए क्योंकि उन्हीं ने इस पार्टी को शुरू किया था। वहीं 3 फीसदी यानि 301 पाठकों ने कह नहीं सकते विकल्प को चुना।