इन दिनों देश में प्रदर्शन का दौर चल रहा है और जहां कहीं भी प्रदर्शन होता है प्रदर्शनकारी भी धड़ल्ले से पहुंच जाते हैं। सराकर इन्हें प्रोफेशनल प्रदर्शनकारी कह रही है और उनका मानना है कि प्रदर्शन करना ही इनका पेशा और व्यापार है।
प्रदर्शनकारियों की वजह से देश में अशांति का माहौल बना रहता है ऐसे में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि शांति और एकता बनाए रखने के लिए कुछ खास कदम उठाए जाने जरूरी हैं। दरअसल ये सारी बात केंद्र सरकार ने सेंट्रल दिल्ली में सीआरपीसी की धारा-144 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश लागू किए जाने के अपने कदम के सही होने के पक्ष में कही।
देश की राजधानी में सेंट्रल दिल्ली वीवीआईपी इलाका है जहां अधिकतर सरकारी भवन, संसद भवन, और वीआईपी निवास हैं। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से उस याचिका पर जवाब मांगा था, जिसमें इस क्षेत्र में लगातार प्रतिबंधात्मक आदेश लागू किए जाने को प्रदर्शन के मौलिक अधिकार का हनन बताया था। जस्टिस एके सिकरी और अशोक भूषण की पीठ एक एनजीओ मजदूर किसान शक्ति संगठन की इस याचिका पर सुनवाई कर रही है, जिसमें सेंट्रल और नई दिल्ली क्षेत्र में इकट्ठा होने और प्रदर्शन करने पर प्रतिबंध लगाने को चुनौती दी गई है।
इस विषय पर अमर उजाला डॉट.कॉम ने पोल कराया और पाठकों से सवाल पूछा कि 'क्या आप भी केंद्र सरकार की इस बात से सहमत हैं कि प्रदर्शनकारी पेशेवर होते हैं?' सवाल के जवाब में पाठकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
कुल 2776 पाठकों ने पोल में हिस्सा लिया। 68.55 फीसदी (1903 वोट) पाठकों ने माना कि वह केंद्र सरकार की इस बात से सहमत हैं कि प्रदर्शनकारी पेशेवर होते हैं। जबकि 31.45 फीसदी (873) पाठकों ने माना कि प्रदर्शनकारी पेशेवर नहीं होते हैं।