स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लालकिले से भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बलूचिस्तान का मुद्दा उठाया। संभवतः यह पहला मौका था जब लाल किले से भाषण के दौरान किसी भारतीय पीएम ने बलूचिस्तान या गिलगित में लोगों पर हो रहे अत्याचारों का जिक्र किया हो। मोदी के भाषण के अगले दिन ही पाकिस्तान ने बलूच नेताओं को वार्ता के लिए बुला लिया।
गौरतलब है कि आए दिन पाक अधिकृत कश्मीर में मानवाधिकारों के उल्लंघन के मामले सामने आते हैं और लोग इन अत्याचारों के खिलाफ लंबे समय से संषर्ष कर रहे हैं। अमर उजाला ने इसी मुद्दे पर पोल कराकर पाठकों से सवाल पूछा था कि, 'स्वतंत्रता दिवस पर पीएम के भाषण में बलूचिस्तान का मुद्दा उठाने से क्या पाकिस्तान पर दबाव बढ़ा है?' इस मुद्दे पर करीब 5,928 पाठकों पर इस पर अपनी राय साझा की।
इनमें से करीब 87.7 फीसदी लोगों का मानना है कि स्वतंत्रता दिवस पर पीएम के भाषण में बलूचिस्तान का मुद्दा उठाने से पाकिस्तान पर दबाव बढ़ा है। वहीं करीब 10.43 फीसदी लोग इस बात से सहमत नहीं दिखे। पोल में हिस्सा लेने वाले करीब 1.87 फीसदी पाठक इस मामले पर अपनी कोई राय नहीं बना पाए।