शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात में एक रैली को संबोधित करते हुए संसद के सुचारू न चलने के मुद्दे पर अपना दुख बयां किया। उन्होंने कहा कि लोकसभा में उन्हें बोलने नहीं दिया जाता इसलिए जनसभा में बोलने का फैसला किया। पीएम ने इस बात से राष्ट्रपति प्रणब दा के भी पीड़ित होने की बात कही। लोकतंत्र के मंदिर में देश के सांसदों के बर्ताव से एक प्रधानमंत्री का इस कदर आहत होना अपने आप में बड़ी ही गंभीर बात है, इसलिए अमर उजाला ने इस मुद्दे पोल कराकर पाठकों से राय लेनी चाही, कि वे आखिर पीएम की बात से आखिर कितना इत्तेफाक रखते हैं।
पोल में कुल मिलाकर 5954 पाठकों ने हिस्सा लिया। सबसे ज्यादा 52.3 फीसदी (3114) पाठकों ने माना कि लोकसभा में पीएम मोदी को बोलने से कोई रोक रहा है। 45.35 फीसदी (2700) पाठकों ने कहा कि ऐसा नहीं है, वे इस बात से कोई इत्तेफाक नहीं रखते हैं।
वहीं, 2.35 फीसदी (140) पाठकों ने इस मुद्दे पर कुछ भी कह पाने में असमर्थता जताई।