बीते सोमवार से समाजवादी पार्टी में चल रही उठापटक के बीच शुक्रवार को मुलायम सिंह यादव ने हस्तक्षेप किया। अखिलेश यादव और शिवपाल यादव से बात करने के बाद उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि पार्टी और परिवार में कोई विवाद नहीं है। मुलायम सिंह यादव ने कहा कि अखिलेश, शिवपाल और रामगोपाल में कोई झगड़ा नहीं है। परिवार और पार्टी में गलतफहमियां हो जाती हैं। अब सभी एक हैं और 2017 में साथ मिलकर दोबारा सत्ता हासिल करेंगे।
इसके साथ ही पांच दिनों से परिवार और पार्टी में चल रही उठापटक खत्म होती दिख रही है। मुलायम सिंह के निर्देश पर शिवपाल के पद और अधिकार पहले जैसे बने रहेंगे और गायत्री प्रसाद प्रजापति को दोबारा मंत्री बनाया जाएगा। वहीं, अखिलेश यादव को संसदीय बोर्ड का अध्यक्ष बनाया गया है।
देश के सबसे बड़े राजनीतिक कुनबे में हुए विवाद के बाद अमर उजाला ने अपने पाठकों से सर्वे कराया। अमर उजाला ने ऑनलाइन पोल के जरिए पाठको से पूछा कि, 'क्या मुलायम के फैसलों से अखिलेश यादव कमजोर पडे़ हैं?' इस पोल में करीब 4 हजार से अधिक पाठकों ने हिस्सा लिया। सर्वाधिक पाठकों की यही राय थी कि 'हां' में थी।
पोल में पाठकों की प्रतिक्रिया जानने के लिए तीन विकल्प दिए गए थे। पहला-हां अखिलेश यादव कमजोर पड़े हैं, दूसरा-नहीं, मुलायम के फैसले से अखिलेश कमजोर नहीं हुआ है। तीसरा- कह नहीं सकते। कुल शामिल 4,047 पाठको में से 3,184 पाठक यानी 78.68 फीसदी ने कहा कि मुलायम के फैसलों से अखिलेश यादव कमजोर पडे़ हैं।
पोल में शामिल 714 पाठक यानी 17.64 फीसदी ने कहा कि मुलायम के इन फैसलों का अखिलेश यादव पर कोई असर नहीं पड़ेगा। वहीं पोल में शामिल 149 पाठक यानी 3.68 फीसदी ने कहा कि वो इस मामले में कुछ कह नहीं सकते।