अमर उजाला फाउंडेशन ने कीबिथू के अपर प्राइमरी स्कूल (कक्षा आठ) के विद्यार्थियों की परेशानियों को देखते हुए दो कंप्यूटर सेट, प्रिंटर और शिक्षा सामग्री भेंट की। स्कूल की कार्यकारी प्रिंसिपल ने गत बुधवार को इसका विधिवत उद्घाटन किया। कंप्यूटर सेट मिलने से विद्यार्थी के चेहरे खिल उठे।
भारत-चीन सीमा पर बसे अरुणाचल प्रदेश के प्रथम गांव कीबिथू में भी अब कंप्यूटर शिक्षा की गंगा बहेगी। गांव के छात्र-छात्राओं को अब कंप्यूटर सीखने के लिए 300 किमी की दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी। यह सब अमर उजाला फाउंडेशन के प्रयासों से ही संभव हो पाया है।
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फाउंडेशन ने कीबिथू के अपर प्राइमरी स्कूल (कक्षा आठ) के विद्यार्थियों की परेशानियों को देखते हुए दो कंप्यूटर सेट, प्रिंटर और शिक्षा सामग्री भेंट की। स्कूल की कार्यकारी प्रिंसिपल ने गत बुधवार को इसका विधिवत उद्घाटन किया। कंप्यूटर सेट मिलने से विद्यार्थी के चेहरे खिल उठे। अप्रैल 2023 में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इसी गांव से बाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम की घोषणा की थी। 1982 में बने इस स्कूल को इसी योजना के तहत मॉडल स्कूल के रूप में विकसित किया गया है। स्कूल के विद्यार्थियों, गांव के लोगों और स्कूल प्रबंधन ने अमर उजाला फाउंडेशन के प्रयास की सराहना की और आभार भी जताया।
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दूर हुईं मुश्किलें, आसानी से उपलब्ध होगी जानकारी
स्कूल की कार्यकारी प्रिंसिपल बाघिनला क्रोंग ने कहा, यह सपना पूरे होने जैसा है। अब तमाम मुश्किलें दूर हो जाएंगी। मेरे पास खुशी जाहिर करने के लिए शब्द नहीं हैं। आज के युग में कंप्यूटर के बिना शिक्षा अधूरी है। हमा बच्चों को इसकी बेसिक शिक्षा देंगे। बच्चे कंप्यूटर फ्रेंडली होंगे तो उनके सपने भी साकार होंगे। अमर उजाला फाउंडेशन ने बहुत बड़ा काम किया है। देश की राजधानी से करीब तीन हजार किलोमीटर दूर आकर हमें यह तोहफा दिया।
विद्यार्थियों के सपनों को लगेंगे पंख
स्कूल प्रबंधन के सदस्य प्रेम कुमार के मुताबिक, हम विद्यार्थियों को कंप्यूटर शिक्षा से जोड़ना चाहते थे लेकिन समझ नहीं आ रहा था कि यह कैसे करें। तभी हमें अमर उजाला फाउंडेशन के बारे में जानकारी मिली और हमने संपर्क साधा। फाउंडेशन ने तुरंत हमारी मांग स्वीकार की और अब सीमा पर स्थित प्रथम गांव के बच्चे कंप्यूटर को देख पा रहे हैं, उसे चला पा रहे हैं। बच्चो को की-बोर्ड पर हाथ चलाते देख बहुत खुशी हो रही है। कीबिथू के स्कूली बच्चों को इसके लिए चालीस साल से भी अधिक समय इंतजार करना पड़ा।