भारतीय कला और संस्कृति को बढ़ावा देने के मकसद से अमर उजाला ‘घराना और परम्परा’ की शुरुआत हो रही है। अमर उजाला ‘घराना और परम्परा’ के तहत लीजेंड्स ऑफ इंडिया संस्था महान तबलावादक स्वर्गीय पंडित शंकर घोष की याद में एक कार्यक्रम आयोजित कर रहा है।
लीजेंड्स ऑफ इंडिया 23 दिसंबर को तबला वादन के साथ ‘म्यूजिक ऑफ द ड्रम्स’ के मनमोहक कार्यक्रम से अमर उजाला के इस अनूठे संगीतमय सिलसिले की शुरुआत करेगा।
लीजेंड्स संगीत नाटक एकेडमी के साथ मिल कर संगठन कई दिग्गजों के दिलकश राग और वाद्य संगीत पेश कर चुका है। अमर उजाला की पहल ‘घराना और परम्परा’ के साथ इसकी जुगलबंदी शास्त्रीय और पारंपरिक संगीत कार्यक्रमों को निश्चित रूप से बुलंदी पर पहुंचाएगी। लीजेंड्स ऑफ इंडिया 23 दिसंबर को ‘म्यूजिक ऑफ ड्रम्स’ के तहत ड्रम ऑर्केस्ट्रा पेश करेगा।
इसके बाद मशहूर तबला वादक विक्रम घोष का एकल वादन होगा। इसमें उस्ताद राशिद खान की तबले पर थिरकती जादुई अंगुलियां भी दर्शकों को मंत्रमुग्ध करेंगी। संस्था को उम्मीद है कि ‘अमर उजाला’ से जुड़ाव भारतीय शास्त्रीय संगीत के सुरों को नए मुकाम पर पहुंचाएगा।
लीजेंड्स ऑफ इंडिया हर साल अपने इस कार्यक्रम में लाइफटाइम अवार्ड देता है। लीजेंड्स ऑफ इंडिया के संस्थापक दीपायन मजूमदार कहते हैं, ‘संस्कृति के विकास में संगीत और कला की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है और यह भूमिका सिर्फ संगीत प्रस्तुति तक ही सीमित नहीं है।
दीवारों, सरहदों को तोड़ने और नई पीढ़ी में सकारात्मक बदलाव लाने में भी भी अहम भूमिका निभाती है। गौरतलब है कि मशहूर तबला वादक पंडित शंकर घोष फर्रुखाबाद घराने से ताल्लुक रखते थे। वह पटियाला घराने की गायकी में भी दखल रखते थे। उन्होंने एक साथ कई तबले बजाने की नई परंपरा शुरू की थी।