कामकाजी महिलाओं के लिए आम सी दिखने वाली जिंदगी भी कितनी कठिन हो सकती है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बाहर की चुनौतियों का सामना करने के बाद उन्हें घर पर भी अलग तरह की जिम्मेदारियों से हर दिन दो-चार होना पड़ता है। अमर उजाला बतरस में इस हफ्ते महिलाओं से जुड़े इसी अहम मुद्दे पर चर्चा हुई। एंकर नंदिता कुदेशिया ने इस हफ्ते बतरस में इन्हीं चुनौतियों को लेकर दो विशेषज्ञों से बात की और जाना कि महिलाओं पर दोहरी जिम्मेदारियों के बोझ का हल क्या है।
इस पूरे पॉडकास्ट को आप शनिवार रात आठ बजे अमर उजाला के सभी सोशल मीडिया हैंडल्स पर सुन सकते हैं।
नंदिता कुदेशिया ने अमर उजाला के स्टूडियो में जिन दो विशेषज्ञों से चर्चा की, उनमें सिनी डिजाइन्स की संस्थापक-एमडी नीतू सिंह और स्पाइस कंपनी की संस्थापक एवं एमडी कुम्मू जोशी भटनागर शामिल रहीं। दोनों ही विशेषज्ञों ने कई अहम सवालों के जवाब दिए। मसलन- कामकाजी महिलाओं पर दोहरे बोझ का जिम्मेदार कौन है? घर में दोनों के कामकाजी होने पर महिलाओं की स्थिति कैसी है? भारतीय परिवारों में महिलाओं को भावानात्मक सहयोग मिले इसके लिए क्या होता है?
बतरस में विशेषज्ञों ने न सिर्फ इन सवालों के जवाब दिए, बल्कि यह भी बताया कि आर्थिक रूप से सफल महिलाओं के संघर्ष की कहानी में क्या कठिनाइयां होती हैं। घर, बच्चे, परिवार, नौकरी महिलाओं के ऊपर हर जिम्मेदारी क्यों आ जाती है। भावनात्मक सहयोग की कामकाजी महिलाओं को कितनी जरूरत है। इसके अलावा महिलाओं की अपनी पहचान की लड़ाई कठिन क्यों है। इसके अलावा भारतीय परिवारों की सोच महिलाओं को लेकर कब बदलेगी। महिलाओं के लिए काम खत्म क्यों नहीं होता है।