लोकप्रिय एंकर और पत्रकार ऋचा अनिरुद्ध ने इस हफ्ते बतरस में कांवड़ यात्रा के इतिहास और उसके मौजूदा स्वरूप को जानने के लिए दो विशेषज्ञों से बात की। साथ ही यह भी जाना कि आखिर कांवड़ यात्रा के दौरान जो घटनाएं हुई हैं, उनकी पृष्ठभूमि क्या है और इन चीजों को कैसे रोका जाए।
अमर उजाला बतरस एक और हफ्ते आम लोगों की जिंदगी से जुड़े अहम मुद्दे के साथ हाजिर है। इस हफ्ते पॉडकास्ट में चर्चा हुई सावन के पावन माह पर होने वाली कांवड़ यात्रा की। उत्तर और मध्य भारत में अलग-अलग शहरों से बड़ी संख्या में कांवड़िए भगवा वस्त्र धारण कर गंगा नदी का पवित्र जल लेकर भगवान शिव के ज्योतिर्लिंगों और लोकप्रिय मंदिरों में पहुंचें। हालांकि, इस बीच कांवड़ यात्रा के दौरान हिंसा से जुड़ी घटनाओं की खबरें भी आईं। वहीं कुछ और अपुष्ट वीडियो भी वायरल हुए, जिनमें कांवड़ यात्रा के दौरान कांवड़ियों की तरफ से मार्ग पर पड़ने वाले होटलों में तोड़फोड़ की बात सामने आई।
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लोकप्रिय एंकर और पत्रकार ऋचा अनिरुद्ध ने इस हफ्ते बतरस में कांवड़ यात्रा के इतिहास और उसके मौजूदा स्वरूप को जानने के लिए दो विशेषज्ञों से बात की। साथ ही यह भी जाना कि आखिर कांवड़ यात्रा के दौरान जो घटनाएं हुई हैं, उनकी पृष्ठभूमि क्या है और इन चीजों को कैसे रोका जाए।
इस पूरे पॉडकास्ट को आप शनिवार रात आठ बजे अमर उजाला के सभी सोशल मीडिया हैंडल्स पर सुन सकते हैं।
ऋचा अनिरुद्ध ने अमर उजाला के स्टूडियो में जिन दो विशेषज्ञों से चर्चा की, उनमें उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह और आध्यात्मिक गुरु डॉ. मीना महाजन शामिल रहीं। दोनों ही विशेषज्ञों ने कई अहम सवालों के जवाब दिए। मसलन- कांवड़ यात्रा का रहस्य क्या है? यह क्यों की जाती है? इससे जुड़ी क्या कहानियां प्रचलित हैं? इसके अलावा पहले की कांवड़ यात्राओं और आधुनिक समय की कांवड़ यात्राओं में किस तरह फर्क आया है? पवित्र कांवड़ यात्रा में जिस तरह की घटनाओं की खबरें आईं उसकी वजह क्या रही और यह किस तरह समाज को प्रभावित करती है?
बतरस में विशेषज्ञों ने न सिर्फ इन सवालों के जवाब दिए, बल्कि यह भी बताया कि सावन महीने का प्राकृतिक,शारीरिक और मानसिक महत्व क्या है? कांवड़ को लेकर कौन सी कहानी सबसे प्रासंगिक? पुलिस प्रशासन यात्रा में नियम कानून के लिए क्या करते हैं? इतना ही नहीं एक्सपर्ट्स ने यह भी बताया कि श्रद्धा के पर्व पर हिंसा की खबरें आती क्यों हैं। अश्लीलता और फूहड़ता करने वाले लोगों के लिए क्या किया जा सकता है। कांवड़ की पवित्रता को दूषित करने वालों पर किस तरह कार्रवाई होती है और धार्मिक आयोजनों में पुलिस प्रशासन की क्या जिम्मेदारी रहती है।
बातचीत के दौरान विशेषज्ञों ने कुछ अहम चीजों को लेकर भी अपनी राय रखी। जैसे- क्या फूहड़ता, उद्दण्डता क्या हमारी पीढ़ी के व्यवहार में आ गई है? इसके अलावा महिला कांवड़ कैसे इस यात्रा का हिस्सा बनती हैं? महिला कांवड़ की सुरक्षा कितनी बड़ी चुनौती है? पंढरपुर यात्रा एक उदाहरण है जो शांति से होती है, क्या-क्या सीखा जा सकता है?