अमर उजाला बतरस एक और हफ्ते आम लोगों की जिंदगी से जुड़े अहम मुद्दे के साथ हाजिर है। इस हफ्ते पॉडकास्ट में चर्चा हुई उत्तर भारत की स्वास्थ्य चिंताएं बढ़ा देने वाले एक बेहद अहम मुद्दे पर। दरअसल, भारत में सर्दियों की झलक दिखाई देने लगी है। रात के तापमान में गिरावट के साथ अब दिन का तापमान भी लगातार नीचे गिर रहा है। दिवाली के बाद उत्तर भारत में सर्दियों का पूरी तरह आगमन हो जाने की उम्मीद है। हालांकि, इसी के साथ एक और खतरा भी मुंह बाए खड़ा है। यह है वायु की खराब होती गुणवत्ता का। सर्दियों में मोटी होती हवा की परत में प्रदूषक भी तेजी से बढ़ते हैं। ऐसे में वायु गुणवत्ता तेजी से खराब होती है। इसका खतरा आम आदमी के फेफड़ों पर दिखता है। बच्चों और बुजुर्गों के मामले में तो यह खतरा काफी ज्यादा रहता है।
एंकर नंदिता कुदेशिया ने इस हफ्ते बतरस में इन्हीं चुनौतियों को लेकर दो विशेषज्ञों से बात की और जाना कि आखिर स्मॉग के अलर्ट के बीच आम लोगों के स्वास्थ्य के खतरे को कम करने के लिए क्या किया जा सकता है।
इस पूरे पॉडकास्ट को आप शनिवार रात आठ बजे अमर उजाला के सभी सोशल मीडिया हैंडल्स पर सुन सकते हैं।
नंदिता कुदेशिया ने अमर उजाला के स्टूडियो में जिन दो विशेषज्ञों से चर्चा की, उनमें पर्यावरणविद् विक्रांत तोंगड़ और हृदय रोग विशेषज्ञ डॉक्टर जयंती शामिल हुईं। दोनों ही विशेषज्ञों ने कई अहम सवालों के जवाब दिए। मसलन- स्मॉग इतना खतरनाक क्यों हो जाता है? स्मॉग का कारण क्या सिर्फ पटाखे और पराली है? किन लोगों को इस मौसम में ज्यादा खतरा होता है? हवा की क्वालिटी जब खराब हो जाए तो क्या करें?
बतरस में विशेषज्ञों ने न सिर्फ इन सवालों के जवाब दिए, बल्कि यह भी बताया कि स्मॉग को खत्म करने के लिए अब तक क्या-क्या किया गया है। रोग प्रतिरोधक क्षमता इस मौसम से पहले से कैसे मजबूत किया जा सकता है। स्मॉग से पीड़ित होने पर किस स्थिति में डॉक्टर के पास जाएं। स्कूली शिक्षा में कैसे हवा की गुणवत्ता पर काम करना बच्चों को सिखाया जाए। स्मॉग वाले मौसम में तबीयत ठीक रखने के घरेलू उपाय क्या हो सकते हैं और सामाजिक स्तर पर और व्यक्तिगत स्तर पर हम कैसे लोगों को जागरूक कर सकते हैं।
बातचीत के दौरान विशेषज्ञों ने दो और अहम सवालों के जवाब दिए। पहला- फेफड़े या ह्रदय रोग से पीड़ित व्यक्ति क्या सावधानियां रख सकते हैं। दूसरा- घर में कौन-कौन से पौधे हवा की क्वालिटी को ठीक कर सकते हैं और सर्दियों में अचानक बढ़ी बीमारियों से बचने के क्या उपाय हो सकते हैं।