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Amarujala Batras: एक तरफ कन्या पूजन, दूसरी तरफ बच्चियों के साथ बढ़ते अपराध; क्या कहता है कानून? देखें पॉडकास्ट

Sat, 27 Sep 2025 08:01 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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अमर उजाला बतरस। - फोटो : Amar Ujala
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अमर उजाला बतरस एक और हफ्ते आम लोगों की जिंदगी से जुड़े अहम मुद्दे के साथ हाजिर है। इस हफ्ते पॉडकास्ट में चर्चा हुई समाज के लिए चिंता में डालने वाले एक विषय पर। मुद्दा रहा- बच्चियों की घटती जन्मदर और उनके खिलाफ बढ़ता अपराध। दरअसल, हाल ही में भारत के कई राज्यों में लड़कियों की जन्मदर में गिरावट देखी गई थी। यानी प्रति 1000 लड़कों के मुकाबले लड़कियों की संख्या में कमी दर्ज हुई। इसे लेकर सामाजिक संस्थाओं ने चिंता जताई है। एंकर नंदिता कुदेशिया ने इस हफ्ते बतरस में इन्हीं चुनौतियों को लेकर दो विशेषज्ञों से बात की और जाना कि आखिर यह समस्या क्यों पैदा हुई है। इसके अलावा लड़कियों के साथ बढ़ते अपराधों की वजह क्या है और इससे निपटने के लिए क्या किया जा सकता है। 
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इस पूरे पॉडकास्ट को आप शनिवार रात आठ बजे अमर उजाला के सभी सोशल मीडिया हैंडल्स पर सुन सकते हैं।  

नंदिता कुदेशिया ने अमर उजाला के स्टूडियो में जिन दो विशेषज्ञों से चर्चा की, उनमें एक्टिविस्ट ऋचा सूद और सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता योगेंद्र श्रीवास्तव शामिल रहे। दोनों ही विशेषज्ञों ने कई अहम सवालों के जवाब दिए। मसलन- एक तरफ जहां देश में कन्या पूजन का रिवाज है, तो दूसरी तरफ बच्चियों के साथ अपराध क्यों बढ़ रहे हैं? बढ़ती भ्रूण हत्या के मामले कितना चौंकाने वाले हैं? पितृ सत्तात्मक समाजिक व्यवस्था से कितनी दिक्कतें हैं? बराबरी की बात पर जमीनी हकीकत डराने वाली क्यों है? कानून का पालन कड़ाई से क्यों नहीं कराया जा रहा है? क्या स्कूल से इस तरह के मामलों में जागरूकता लाना चाहिए? लिंग जांच के लिए भारत में कानून क्या है और इसकी सच्चाई क्या है?

बतरस में विशेषज्ञों ने न सिर्फ इन सवालों के जवाब दिए, बल्कि यह भी बताया कि अनुशासन और कड़े कानून को कैसे लागू किया जा सकता है। इसके अलावा बेटा होगा तभी मोक्ष मिलेगा, समाज की ये मानसिकता कैसे खत्म की जा सकती है। लड़कियों को लेकर मानसिकता कब और कैसे बदलेगी। साथ ही अगली पीढ़ी को लड़के-लड़की के भेद से कैसे मुक्त किया जाए?
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