वायु प्रदूषण का असर अब आम जिंदगी पर दिखने लगा है। अस्पतालों में धीरे-धीरे सांस, गले और फेफड़े से जुड़ी बीमारियों की शिकायत करने वालों की संख्या भी बढ़ी है। बीते हफ्ते अमर उजाला बतरस में खराब वायु गुणवत्ता और इसके प्रभावों को लेकर विशेषज्ञों ने चर्चा में अपनी राय रखी थी। एक और हफ्ते पॉडकास्ट में चर्चा का मुद्दा वायु प्रदूषण ही रहा। हालांकि, इस बार खराब हवा के प्रभावों से आगे बढ़कर इसके बच्चों पर पड़ने वाले असर को भी जाना गया।
इस पूरे पॉडकास्ट को आप शनिवार रात आठ बजे अमर उजाला के सभी सोशल मीडिया हैंडल्स पर सुन सकते हैं।
चर्चित एंकर और पत्रकार नंदिता कुदेशिया ने इस हफ्ते बतरस में इन्हीं समस्याओं को लेकर जिन दो विशेषज्ञों से बात की, उनमें जानी-मानी गायनोलॉजिस्ट अदिति घई और न्यूरोलॉजिस्ट शिशिर पाण्डे शामिल रहे। दोनों ही विशेषज्ञों ने कई अहम सवालों के जवाब दिए। मसलन- वायु प्रदूषण का असर आम लोगों और बच्चों के मस्तिष्क को किस तरह प्रभावित कर रहा है? इसका गर्भवती महिलाओं के भ्रूण पर कैसे और कितना प्रभाव होता है? गर्भ में बच्चे के विकास पर दूषित हवा कितना असर डालती है? इसके अलावा क्या रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए बच्चों को बाहर भेजना चाहिए?
बतरस में विशेषज्ञों ने न सिर्फ इन सवालों के जवाब दिए, बल्कि यह भी बताया कि मौजूदा समय में एकाग्रता,ध्यान और मस्तिष्क प्रदूषण से कितने प्रभावित हो सकते हैं। प्रदूषण से गर्भपात की समस्या कितनी है और गर्भवती महिलाएं अपना ध्यान रखने के लिए क्या कर सकती हैं। इसके अलावा बढ़ते बच्चों की बीमारियों में प्रदूषण की कितनी भूमिका है? साथ ही ब्रेन फॉग की समस्या में प्रदूषण कितना जिम्मेदार है। इसके अलावा प्रदूषण वाले इलाकों में अपने बच्चे का ख्याल कैसे रख सकते हैं।