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सीबीआई निदेशक पद से हटाए गए आलोक वर्मा, सेलेक्ट कमेटी ने 2-1 से लिया फैसला

Thu, 10 Jan 2019 07:30 PM IST
शशांक गौर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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CBI Director Alok Verma
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आलोक वर्मा को सीबीआई के डायरेक्टर पद से हटा दिया गया है। वह बुधवार को ही सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद 77 दिन बाद अपने काम पर लौटे थे। उन्हें डीजी फायर सेफ्टी विभाग बनाया गया है।
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दोबारा पदभार संभालते ही उन्होंने तबादले के पुराने आदेश रद्द कर दिए थे। इसके अलावा गुरुवार को ही 5 अफसरों के तबादले का आदेश दिया था। करीब 36 घंटे बाद ही उन्हें पदमुक्त कर दिया गया। अब नागेश्वर राव दोबारा सीबीआई प्रमुख का पद संभाल सकते हैं।

पीएम की अगुवाई वाली सेलेक्ट कमेटी ने आलोक वर्मा पर 2-1 के बहुमत से फैसला लिया। मल्लिकार्जुन खड़गे ने वर्मा को हटाने का विरोध किया था। लेकिन पीएम मोदी और जस्टिस सीकरी उन्हें हटाने के पक्ष में थे।
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बता दें कि राकेश अस्थाना से विवाद के बाद उन्हें सरकार ने लंबी छुट्टी पर भेज दिया था। आलोक वर्मा के भविष्य को लेकर पीएम आवास पर उच्चस्तरीय कमेटी की बैठक हुई जिसमें यह फैसला लिया गया। इस कमेटी में कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और जस्टिस ए के सीकरी भी शामिल थे। 

इससे पहले बुधवार को भी सेलेक्ट कमेटी की बैठक हुई थी। इसमें सीवीसी ने केंद्रीय जांच एजेंसी के निदेशक आलोक वर्मा से जुड़े मामले की फाइलें कमेटी को दिखाई थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जस्टिस सीकरी और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की मौजूदगी में करीब डेढ़ घंटे तक चली बैठक में आलोक वर्मा को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकल पाया था। 
 

सीवीसी ने आलोक वर्मा से जुड़े दस्तावेज रखे थे 

सीबीआई निदेशक के मामले को लेकर बुधवार रात पीएम आवास पर हुई सेलेक्ट कमेटी की बैठक के दौरान सीवीसी ने आलोक वर्मा से जुड़े कई दस्तावेज रखे थे। सूत्रों का कहना है कि सीवीसी ने कमेटी के समक्ष जांच एजेंसी के स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना द्वारा आलोक वर्मा पर जो आरोप लगाए गए थे, वे फाइलें भी पेश की हैं। इसके अलावा राकेश अस्थाना ने आलोक वर्मा के खिलाफ पिछले साल कैबिनेट सचिव और सीवीसी को जो शिकायत भेजी थी, उन पर सीवीसी ने जो सीक्रेट कमेंटस किए थे, वे सब कमेटी के सदस्यों को दिखाए गए हैं। 

बताया जाता है कि सीवीसी ने अपनी जांच में यह भी लिखा था कि दोनों निदेशकों की लड़ाई जांच एजेंसी को नुकसान पहुंचा रही है। भले ही सीवीसी ने नाम लेकर न सही, लेकिन उन्होंने अपनी रिपोर्ट में इस बात का स्पष्ट संकेत दिया था कि आलोक वर्मा और राकेश अस्थाना, दोनों को कहीं दूसरी जगह शिफ्ट कर दिया जाए। अगर इनमें से कोई भी निदेशक सीबीआई में सभी अधिकारों के साथ दोबारा लौटता है तो वह एजेंसी के लिए ठीक नहीं होगा।
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खड़गे चाहते हैं कि आलोक वर्मा अपनी बात रखें

नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे चाहते थे कि आलोक वर्मा सेलेक्ट कमेटी के सामने अपनी बात रखें। उन्होंने बुधवार को हुई बैठक के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी और जस्टिस सीकरी को अपने पक्ष से अवगत करा दिया था। उनका तर्क था कि सेलेक्ट कमेटी केवल सीवीसी की रिपोर्ट पर चर्चा कर रही है। 

इसी आधार पर आलोक वर्मा के भविष्य का फैसला नहीं हो सकता इसके लिए जरुरी है कि आलोक वर्मा को कमेटी के सामने बुलाया जाए। उधर, राहुल गांधी ने भी अपने एक बयान में कहा था कि मोदी आलोक वर्मा केस को लेकर इतनी जल्दबाजी में क्यों हैं। कहीं न कहीं, इसके पीछे राफेल तो वजह नहीं है। 

दूसरी ओर, आलोक वर्मा ने ज्वाइनिंग के पहले ही दिन अपने चहेते अफसर एके बस्सी, अश्वनी गुप्ता, एसपी ग्रुम और ज्वाइंट डायरेक्टर एके शर्मा को वापस बुला लिया है। वर्मा के छुट्टी पर जाने के बाद इनमें किसी अफसर का दिल्ली से बाहर तबादला कर दिया गया तो अन्य अफसर दूसरी ब्रांच में तैनात कर दिए गए।

इनमें डीएसपी एके बस्सी को अंडमान भेजने के आदेश जारी हुए थे। अपने तबादला आदेश के ख़िलाफ़ वे अदालत भी गए थे। बस्सी को आलोक वर्मा का विश्वासपात्र माना जाता है। राकेश अस्थाना के भ्रष्टाचार मामले की जांच बस्सी को ही सौंपी गई थी।
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