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स्वच्छता अभियानः खुले में शौच के लिए जाते हैं 60 करोड़ भारतीय

Fri, 27 Jan 2017 04:45 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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- फोटो : amarujala
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हर साल लाखों लोग (इनमें से अधिकांश बच्चे) पानी की कमी, सफाई न होना और हाइजीन की कमी के चलते होने वाली बीमारियों की वजह से काल के गाल में समा जाते हैं। सतत विकास लक्ष्य के तहत अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस बात के लिए दृढ़प्रतिज्ञ हैं कि पानी और स्वच्छता से जुड़ी गतिविधियों और कार्यक्रमों के लिए सहयोग बढ़ाया जाएगा। यद्यपि लक्ष्य 6 के तहत दुनिया भर के देश साफ पीने के पानी और पर्याप्त सफाई तक सभी की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए काम करेंगे। 
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दूसरी ओर भारत सरकार ने भी सफाई के स्तर को उठाने के लिए इसे अपनी प्राथमिकताओं में शामिल किया है। सरकार ने कई फ्लैगशिप कार्यक्रम शुरू किए हैं, इनमें स्वच्छ भारत के लिए स्वच्छ भारत अभियान, राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम और नमामि गंगे कार्यक्रम प्रमुख है। नमामि गंगे कार्यक्रम गंगा नदी के संरक्षण से जुड़ा कार्यक्रम है। 

भारत और लक्ष्य-6
- ग्रामीण इलाकों में 50 प्रतिशत घरों के लोग खुले में शौच के लिए जाते हैं।

- 2005-06 में लड़कियों के लिए अलग से शौचालय वाले स्कूलों की संख्या 0.4 मिलियन (4 लाख) थी, जबकि 2012-13 में यह बढ़कर 1.24 मिलियन (12.4 लाख) हो गई है। 
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- भारतीय घरों में पानी के स्त्रोत की पहुंच 1992-93 में 68 प्रतिशत थी जोकि 2011-12 में बढ़कर 90.6 प्रतिशत हो गई है। 

- हालांकि 2012 में ग्रामीण भारत के 59 प्रतिशत घरों और 8 प्रतिशत शहरी घरों में सफाई के लिए पर्याप्त सुविधाएं मौजूद नहीं थी। 

- दूसरी ओर 60 करोड़ भारतीय अब भी खुले में शौच के लिए जाते हैं। यह संख्या दुनिया भर में सबसे ज्यादा है। 

 
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