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राज्यों को सीधे आरबीआई से कर्ज लेने की मिले अनुमति, केरल सरकार ने उठाई मांग

Mon, 13 Apr 2020 05:38 AM IST
संदीप भट्ट न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना महामारी को देखते हुए केरल सरकार ने केंद्र की मोदी सरकार से आग्रह किया है कि वह राज्यों को आरबीआई से सीधा कर्ज लेने की अनुमति दे। केरल के वित्त मंत्री थॉमस इसाक ने मौजूदा हालात में केंद्र से राजकोषीय नीति उदार करके मुद्रा की छपाई करने और राज्यों को सीधे केंद्रीय बैंक से कर्ज लेने की अनुमति देने का आग्रह किया है।

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कोरोना वायरस महामारी की रोकथाम और इस संकट से उत्पन्न हालात से निपटने के लिये राज्यों में धन जुटाने की छटपटाहट है। ऐसे हालात में उन्होंने यह बात कही है। इसाक ने उम्मीद जतायी कि केरल सरकार को महामारी बांड जारी करने की अनुमति मिल जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि राजकोषीय नीति मोर्चे पर मौजूदा शर्तों और सीमाओं से राज्य कर्ज के जाल में फंस सकते हैं।

उन्होंने टेलीफोन पर पीटीआई भाषा से बातचीत में कहा कि राज्यों को पूंजी बाजारों में जाने के लिये मजबूर नहीं किया जाना चाहिए और केंद्र को पहले तो राजकोषीय घाटे की सीमा बढ़ानी चाहिए। साथ ही राज्यों को रिजर्व बैंक से सीधे कर्ज लेने की अनुमति देनी चाहिए। केरल को मंगलवार को 15 साल के राज्य विकास बांड के जरिए बाजार से 6,000 करोड़ रुपये की पूंजी जुटाने के लिए 8.96 प्र्रतिशत ब्याज की पेशकश करनी पड़ी।
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उन्होंने कहा ‘सभी राज्य अल्प अवधि के लिये कम राशि के कर्ज का विकल्प अपना रहे हैं।’ केरल के वित्त मंत्री ने इस समय राज्यों को बाजारसे कर्ज के लिए बांड पर औसतन 8 प्रतिशत से अधिक के ब्याज (कूपन दर) पेश करने की मजबूरी पर सवाल किया। उन्होंने कहा, ‘सवाल यह है कि बाजार ऐसा व्यवहार क्यों कर रहा है....ऋण बजार में एक तरह से रोक है।’

इसाक ने कहा ‘राजकोषीय नीति के कारण सीमाएं हैं। भारत सरकार के रिजर्व बैंक से सीधे कर्ज लेना चाहिए....राज्यों को भी रिजर्व बैंक से कर्ज लेने की अनुमति देनी चाहिए।’ उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं होने पर स्थिति ऐसा होगी जिससे राज्य सरकारें कर्ज जाल में फंस जाएगी।

इसाक ने कहा ‘जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) में गिरावट आने जा रही है और 9 प्रतिशत ब्याज देना उपयुक्त नहीं होगा। इस नीति से राज्य सरकारें राजकोषीय संकट में फंस जाएगी।’ केरल कोरोना वायरस संक्रमण को रोकने के लिये कड़े कदम उठाये हैं। उसने मौजूदा स्थिति से निपटने के लिये 20,000 करोड़ रुपये का पैकेज जारी किया है जो कि कर्ज से जुटाया गया।

उन्होंने कहा ‘केंद्र सरकार राज्य सरकारों को अपना खर्च में कमी लाने के लिये दबाव दे रही है। यह नीति समझ से परे हैं। ऐसी नरमी की स्थिति में आप राज्य सरकार को व्यय में कमी लाने के लिये कह रहे हैं।’ फिलहाल राज्य को राज्य जीडीपी का 3 प्रतिशत तक कर्ज लेने की अनुमति है।

इसाक ने कहा, ‘बजट को लेकर पहले ही बाधाएं हैं...हमें जीएसडीपी का 3 प्रतिशत कर्ज लेने की अनुमति है। हमने पहले ही कर्ज ले लिया है ताकि हम संकट के समय अपनी मांगों को पूरा कर सके।’

उन्होंने कहा ‘...जबतक आप ‘लॉकडाउन’ में रह रहे पूरी आबादी की बुनियादी जरूरतों को पूरा नहीं करते, आप अनुपालन नहीं करा पाएंगे....।’ वित्त मंत्री ने कहा कि इस समय अतिरिक्त नोट छापना बिल्कुल व्यवहारिक है। उन्होंने अमेरिकी फेडरल रिजर्व और यूरोपीय सेंट्रल बैंक का उदाहरण दिया। फेडरल रिजर्व और अन्य केंद्रीय बैंक बाजार में नकदी बढ़ाने के लिये सीधे बांड खरीद रहे हैं।

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