इस मुद्दे पर भाजपा में असमंजस है। पहले पार्टी की रणनीति राज्यसभा में निजी बिल के माध्यम से राम मंदिर निर्माण का प्रस्ताव लाने की थी। मगर बाद में इस आशय की घोषणा करने वाले सांसद राकेश सिन्हा ने चुप्पी साध ली। पार्टी के सांसद संसदीय दल में राम मंदिर के लिए कानून की मांग कर रहे हैं, जबकि खुद पार्टी अध्यक्ष शाह ने विहिप और संघ के अध्यादेश या कानून बनाने की मांग पर कहा था कि पार्टी इस मुद्दे पर जनवरी के अंत में होने वाली सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई का इंतजार करेगी। गौरतलब है कि इसी मुद्दे पर शाह ने दो दिन पूर्व संघ प्रमुख मोहन भागवत से भी बंद कमरे में बात की है।
घेर रही है शिवसेना तो अकाली चुप
मुख्य सहयोगियों में शिवसेना जिसने अगला लोकसभा चुनाव अलग लडने का फैसला किया है, उसने हिंदुत्व के मुद्दे पर भाजपा का पेच कसने की रणनीति बनाई है। जबकि दूसरी सहयोगी अकाली दल चुप है। शिवसेना खुल कर राम मंदिर के लिए अध्यादेश लाने या कानून बनाने का मांग कर रही है। इसी रणनीति के तहत शिवसेना प्रमुख उद्घव ठाकरे के अयोध्या के बाद अब काशी की यात्रा करने की घोषणा की है।