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स्मार्ट सिटी की दौड़ में पिछड़ा इलाहाबाद

Wed, 14 Dec 2016 04:05 AM IST
सुदीप ठाकुर/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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स्मार्ट सिटी - फोटो : अमर उजाला
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भारत के जिन तीन शुरुआती शहरों का नाम अमेरिकी मदद से स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित किए जाने के लिए तय किया गया था, उनमें इलाहाबाद बाकी दो शहरों विशाखापटनम (वाइजाग) और अजमेर से काफी पिछड़ गया है। 
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दो वर्ष पूर्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा से उनकी बातचीत में यह सहमति बनी थी। इसके मुताबिक अमेरिकी व्यापार और विकास एजेंसी (यूएसटीडीए) को इन तीन शहरों को वृहत मास्टर प्लान तैयार करने में मदद करनी थी। उत्तर प्रदेश के लिए यह बड़ा झटका है कि यूएसटीडीए ने अब तक इलाहाबाद को स्मार्ट सिटी की जरूरतों के अनुकूल नहीं पाया है।

स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत अमेरिकी यात्रा पर गए भारतीय पत्रकारों के एक दल के साथ मुलाकात में यूएसटीडीए के प्रतिनिधियों ने स्वीकार किया कि इलाहाबाद में काम अब भी शुरुआती चरण में है। उल्लेखनीय है कि इलाहाबाद पिछले दो चरणों में स्मार्ट सिटी प्रतियोगिता में पिछड़ चुका है। वहीं अजमेर और विशाखापटनम दूसरे और तीसरे चरण में पहुंच चुके हैं। 
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अमेरिकी दिग्गज मल्टी नेशनल इंजीनियरिंग कंपनी एकॉम काफी उत्साहित है

इन दो शहरों को लेकर यूएसटीडीए के साथ ही अमेरिका का वाणिज्य मंत्रालय और स्मार्ट सिटी परियोजना में संभावनाएं तलाश रही अमेरिकी दिग्गज मल्टी नेशनल इंजीनियरिंग कंपनी एकॉम काफी उत्साहित है।

असल में यूएसटीडीए अमेरिकी सरकार की वह एजेंसी है, जो अमेरिकी कंपनियों को अपनी सेवाएं और निर्यात कर रोजगार पैदा करने में मदद करती है। इसका सीधा संबंध निवेश से है। इसने अतीत में भारत में ऊर्जा, परिवहन और दूरसंचार के क्षेत्र में ढांचागत विकास के लिए काफी निवेश जुटाया है। इस लिहाज से स्मार्ट सिटी को विकसित करने में इसकी अहम भूमिका है।

यूएसटीडीए के चीफ ऑफ स्टॉफ डेविन हैम्पटन, अमेरिकी वाणिज्य विभाग के अंतर्गत अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रशासन में उप सचिव विनय विजय सिंह और अमेरिकी मल्टी नेशनल इंजीनियरिंग कंपनी एकॉम की वाइस प्रेसिडेंट एशले ओकूनर और यूएसटीडीए के स्ट्रेटेजिक कम्यूनिकेशन की डाइरेक्टर एना हमफ्रे के साथ हुई मुलाकात में साफ नजर आया कि उनकी दिलचस्पी अभी सिर्फ विशाखापटनम और अजमेर में है।
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अजमेर को विश्व स्तर के पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा सकता है

हैरत की बात यह है कि इलाहाबाद को लेकर किसी तरह का अध्ययन यूएसटीडीए के प्रतिनिधियों के पास नहीं था। अमर उजाला के एक सवाल पर एना हैम्फ्रे ने कहा, मैं ऐसी किसी रिपोर्ट को लेकर आश्वस्त नहीं हूं, मगर मुझे भरोसा है कि स्थानीय टीम ने जरूर अध्ययन किया होगा।

वहीं डेविड हैम्पटन ने कहा, इलाहाबाद में अभी उस स्तर का काम नहीं हुआ है, जैसी जरूरत है, मगर हम उसे विशाखापटनम और अजमेर की तरह वृहत मास्टर प्लान तैयार करने में मदद करना चाहते हैं।

हैम्पटन ने अजमेर में काफी संभावनाएं जताते हुए कहा कि उसे विश्व स्तर के पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा सकता है। उल्लेखनीय है कि विशाखापटनम तीसरे चरण में आ गया है। वहां आधारभूत संरचना के विकास में जुड़ी एकॉम की एशले ओकूनर ने कहा कि सिर्फ तकनीक से कोई शहर स्मार्ट नहीं बन सकता। तकनीक सक्षम बनाती है, मगर लोगों की भागीदारी भी जरूरी है।

ट्रंप के आने से फर्क नहीं पड़ेगा
अमेरिका में सत्ता परिवर्तन से भारत की स्मार्ट सिटी परियोजना पर कोई फर्क नहीं पडेगा। यह कहना है राष्ट्रपति बराक ओबामा द्वारा नियुक्त किए गए अमेरिकी वाणिज्य विभाग में अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रशासन से संबद्ध उप सचिव विनय विजय सिंह का।

क्या डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने से भारत के स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट को लेकर अमेरिका की नीतियां और प्राथमिकताएं बदल तो नहीं जाएंगी? इस पर उनका कहना था, हमारी प्राथमिकताएं राजनीति से प्रभावित नहीं होती।
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