सतारूढ़ समाजवादी पार्टी को इलाहाबाद हाईकोर्ट से तगड़ा झटका लगा है। अखिलेश कैबिनेट के उस फैसले पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है, जिसमें राज्य सरकार ने ओबीसी की 17 जातियों को sc कोटे में डाल दिया था। मंगलवार को हाईकोर्ट ने इस फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए फैसले पर तत्काल रोक लगा दी है।
Uttar Pradesh: Allahabad High Court stays UP Govt's order to include 17 sub-castes in the SC category.
— ANI UP (@ANINewsUP) January 24, 2017
चुनाव के ठीक पहले अखिलेश सरकार के चुनावी दांव चलते हुए 17 जातियों को एससी में शामिल करने के प्रस्ताव को हरी झंडी दिखाई थी। चुनाव के लिहाज से इन 17 जातियों का वोट प्रदेश में चुनावी तस्वीर बदलने की स्थिति में हैं। इन जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल शिल्पकार, मझवार, गौड़, बलदार और तुरैया की उपजाति के रूप में परिभाषित किया गया था।
जिन 17 अति पिछड़ी जातियों को अनुसूचित जातियों में शामिल किया गया था, प्रदेश में उनकी आबादी 13.63 प्रतिशत है। 13 निषाद जातियों की आबादी 10.25 प्रतिशत है जबकि राजभर 1.32, कुम्हार 1.84 और गोंड़ 0.22 प्रतिशत है। इन जातियों में कहार, कश्यप , केवट, मल्लाह, निषाद, कुम्हार, प्रजापति, धीमर, बाथम, तुरहा, गोंड, बिंद शामिल थे।
इससे पहले 2005 में मुलायम सरकार ने इस संबंध में शासनादेश जारी किया था। हाईकोर्ट ने इस पर रोक लगा दी तो प्रस्ताव केंद्र को भेजा। 2007 में मायावती सत्ता में आईं तो इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया, बाद में खुद पत्र लिखा। बाद में अखिलेश सरकार ने लोकसभा चुनाव के पहले फिर प्रस्ताव भेजा जिसे केंद्र ने खारिज कर दिया।