हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार से पूछा है कि प्राथमिक विद्यालयों में बच्चों के बैठने का उचित प्रबंध क्यों नहीं है। बच्चे दरी और बोरों पर क्यों बैठते हैं। कोर्ट ने सरकारी प्राइमरी स्कूलों में शौचालय, पेयजल आदि मूलभूत आवश्यकताओं की भी जानकारी मांगी है।
प्रमुख सचिव प्राथमिक शिक्षा को निर्देश दिया है कि वह अधिकारियों के साथ बैठक कर इस विषय पर कार्ययोजना तैयार करें और अदालत को अवगत कराएं कि सरकार इस दिशा में क्या करने वाली है।
कृष्ण प्रकाश त्रिपाठी की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही मुख्य न्यायमूर्ति डीबी भोसले और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की पीठ ने 14 दिसंबर तक इस मामले में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। याची का कहना है कि प्रदेश के अधिकांश प्राथमिक विद्यालयों में बच्चों के बैठने के लिए बेंच या कुर्सी की व्यवस्था नहीं है।
बच्चे दरी या बोरा बिछाकर जमीन पर बैठते हैं। जाड़े के दिनों में इससे काफी परेशानी होती है। इसके अलावा विद्यालयों में शौचालय तथा पीने के पानी जैसी मूलभूत आवश्यकताओं की कमी है। कोर्ट ने प्रमुख सचिव को अगली तारीख तक इस संबंध में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
परीक्षाओं में नकल को लेकर चिंतित
अतुल माहेश्वरी छात्रवृत्ति परीक्षा
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इधर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने यूपी में बोर्ड परीक्षाओं की साख और शुचिता फिर से लौटाने के लिए माध्यमिक शिक्षा विभाग व यूपी बोर्ड को कड़े निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा, बोर्ड परीक्षाओं की साख तेजी से गिरी है। आम जनता भी यह मानने लगी है।
15 साल पहले तक देश में यूपी बोर्ड की साख थी लेकिन अब बड़े पैमाने पर होने वाली नकल और अन्य अनियमितताओं की वजह से काफी नुकसान हुआ है। इस मामले में विमलेश कुमार शर्मा ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। उनका कहना है कि यूपी बोर्ड इलाहाबाद की परीक्षाएं कुछ माह बाद ही होंगी।
परीक्षा केंद्रों पर सामूहिक नकल और अन्य गड़बड़ियां रोकने की जरूरत है। लिहाजा, हाईकोर्ट इसे रोकने के लिए कड़े निर्देश जारी करे।
जस्टिस अमरेश्वर प्रताप साही और जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय ने अपने निर्णय में कहा, किसी भी बोर्ड या विश्वविद्यालय की परीक्षा में अपनाई जाने वाली निष्पक्षता ही इन परीक्षाओं की पवित्रता और शुचिता तय करती है। लेकिन आज यूपी बोर्ड के बारे में आमजन की धारणा काफी खराब है।
सभी लोग यह मानते हैं कि इन परीक्षाओं में बड़ी गिरावट आई है। इसके लिए प्रदेश सरकार और बोर्ड के अधिकारियों से अपेक्षा की जाती है कि वे तत्काल कदम उठा कर इस गिरावट को रोकें और बोर्ड की साख को फिर उसी स्तर पर पहुंचाएं जो 10-15 साल पहले थी।
परीक्षा केंद्र चयन में विशेष सावधानी बरतें
एमडीयू की प्रवेश परीक्षा
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हाईकोर्ट ने माध्यमिक शिक्षा विभाग व बोर्ड से कहा है कि परीक्षा केंद्रों के चयन में विशेष सावधानी बरतें। यह उनका सबसे महत्वपूर्ण काम है। जिला विद्यालय निरीक्षकों से कहा गया है कि केंद्रों का चयन करते समय सजग रहें। परीक्षा केंद्र तभी बनाएं जब पूरी तरह आश्वस्त हों कि कॉलेज की साख ठीक है। इन निर्देशों का सभी अधिकारियों को कड़ाई से पालन करने को कहा गया है। प्रमुख सचिव माध्यमिक शिक्षा से कहा गया है कि वे सभी जिलाधिकारियों, जिला विद्यालय निरीक्षकों और अन्य अधिकारियों को इन निर्देशों की कॉपी तुरंत भिजवाएं।
प्रमुख सचिव और अधिकारी सुनिश्चित करें साख लौटाना
याचिका का निपटारा करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि याचिका में जनहित का वाजिब सवाल उठाया गया है। अत: प्रमुख सचिव माध्यमिक शिक्षा, निदेशक माध्यमिक शिक्षा और यूपी बोर्ड इलाहाबाद के सचिव को निर्देश दिए जाते हैं कि वे ऐसे कदम उठाएं जिससे 2017 की परीक्षा निष्पक्ष ढंग से हो सके। उन्हें बड़े पैमाने पर होने वाली नकल रोकनी होगी। इसके लिए प्रदेश की मशीनरी व अन्य विभाग भी सहयोग करें। जिला स्तर पर प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों से कहा गया है कि वे भी शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ पूरा सहयोग करें।