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संसद का शीत सत्र कल से, नोटबंदी पर हंगामा तय

Tue, 15 Nov 2016 08:58 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
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संसद के बुधवार से शुरू हो रहे शीतकालीन सत्र में नोट बंदी के मामले में हंगामा तय है। सत्र शुरू होने से दो दिन पूर्व एकजुट विपक्ष और सरकार ने एक दूसरे पर इस मुद्दे पर हमला बोलने की ठोस रणनीति तैयार कर ली है। कांग्रेस, टीएमसी, भाकपा, माकपा, राजद, जदयू, वाईएसआर कांग्रेस और झामुमो ने संयुक्त बैठक कर जहां इस निर्णय के कारण लोगों को हो रही परेशानी को मुद्दा बना कर सरकार को घेरने की रणनीति बनाई है, वहीं प्रधानमंत्री की अगुवाई में हुई भाजपा संसदीय समिति की बैठक में विपक्ष पर जवाबी हमला बोलने की रणनीति तैयार हो गई है। इस बैठक में पीएम मोदी ने विपक्ष के दबाव में न झुकने की बात कही है।
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विरोध जताने के लिए विपक्ष मंगलवार को मार्च भी निकाल सकता है। चूंकि कई दलों ने संसद के दोनों सदनों में पहले ही दिन इस मुद्दे पर चर्चा कराने का नोटिस दिया है, ऐसे में सत्र की शुरुआत हंगामे से ही होने के पूरे आसार बन गए हैं। गौरतलब है कि सत्र के दौरान मध्य प्रदेश में जेल से भागे सिमी के कथित आतंकवादियों के एनकाउंटर, कश्मीर में बीते तीन महीने से जारी असामान्य हालात जैसे कई मुद्दों पर भी हंगामा होना तय है।

शीत सत्र में नोट बंदी के मामले में हंगामे की जमीन तैयार हो गई है। कांग्रेस के राज्यसभा में संसदीय दल के नेता गुलाम नबी आजाद, आनंद शर्मा, सीपीआई के डी राजा, राजद के प्रेम चंद गुप्ता सहित कुछ नेताओं ने बैठक कर सरकार पर एकजुट हमले की रणनीति बनाई। बैठक में कथित तौर पर नोट बंदी के फैसले के दिन पश्चिम बंगाल में भाजपा के खाते में जमा हुई एक करोड़ की रकम के मुद्दे को उठाने, नोट बंदी पर श्वेत पत्र लाने, भाजपा के राज्य इकाईयों और केंद्रीय मुख्यालय से जुड़े खातों में आई रकम सार्वजनिक करने की मांग करने पर सहमति बनी। हालांकि इस दौरान टीएमसी की पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की अगुवाई में सभी दलों के नेताओं के राष्ट्रपति से मुलाकात करने पर सहमति नहीं बन पाई। मंगलवार को कुछ और दल साथ बैठकर भावी रणनीति तैयार करेंगे।
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सरकार की ओर से भी विपक्ष पर जवाबी हमला बोलने की रणनीति तैयार की गई। पीएम के अलावा गृह मंत्री राजनाथ सिंह, वित्त मंत्री अरुण जेटली सहित कई वरिष्ठ मंत्रियों और नेताओं की अगुवाई में हुई इस बैठक में आक्रामक रुख अपनाने की रणनीति बनी। सूत्रों के मुताबिक पीएम ने दो टूक शब्दों में कहा कि लोग नोट बंदी के फैसले को हाथों हाथ ले रहे हैं। ऐसे में विपक्ष के दबाव में झुकने के बदले आक्रामक अंदाज में आगे बढ़ने की जरूरत है। सरकार संसद में इस मुद्दे पर विपक्ष पर गुमराह करने और काला धन इकट्ठा करने वालों की परोक्ष मदद करने का आरोप लगाएगी। बैठक में फैसला लिया गया कि सरकार विपक्ष की चर्चा की मांग को स्वीकार करेगी और इस फैसले को काला धन खत्म करने का चुनावी वादा पूरा करने के रूप में पेश करेगी।

नोट बंदी पर सभी दलों ने की चर्चा की मांग

- फोटो : pti
नोट बंदी पर सभी दलों ने की चर्चा की मांग
सत्र को सुचारु रूप से चलाने के लिए लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन की ओर से बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में सभी दलों ने सहयोग का वादा किया। हालांकि विपक्ष ने पहले ही दिन नोट बंदी के कारण हो रही परेशानी के मामले में चर्चा की मांग की। साथ ही सर्जिकल स्ट्राइक पर भी चर्चा की मांग की गई है।

​माकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा कि मोदी को जमीनी हकीकत की जानकारी नहीं है कि नोट बंदी के फैसले से पूरा देश परेशान है। 500-1000 के नोट बंद करने का कोई खास लाभ नहीं होने वाला है। एटीएम और बैंक लोगों की परेशानी दूर करने में कामयाब नहीं हो रहे। केंद्र सरकार को केरल सरकार से सीख लेनी चाहिए, जिसने पुराने नोटों को 31 दिसंबर तक चलाने की छूट दी है। केंद्र सरकार के साथ ही दूसरे राज्यों को भी ऐसा ही करना चाहिए। वहीं, संसदीय कार्य मंत्री वेंकैया नायडू ने कहा कि सरकार हर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है।

सरकार ने भाजपा को लीक की सूचना 
काले धन के खिलाफ कार्रवाई पर हम सहमत हैं लेकिन नोट बंदी को जिस तरह लागू किया, वह तरीका गलत है। ऐसा लगता है कि सरकार ने भाजपा को यह सूचना पहले ही लीक कर दी थी। अन्य दलों को यह जानकारी घोषणा से सिर्फ दो घंटे पहले दी गई। 
गुलाम नबी आजाद, कांग्रेस
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नोटबंदी के फैसले पर एकजुट हैं सभी सहयोगी दल, सरकार का देंगे साथ

सरकार की सहयोगी पार्टी शिवसेना और अकाली दल ने नोटबंदी के कदम पर सवाल उठाने के बाद संसद में सरकार का साथ देने का निर्णय लिया है। संसद सत्र की रणनीति को अंतिम रूप देने के लिए हुई राजग नेताओं की बैठक में सरकार के सभी सहयोगी दलों ने नोटबंदी के मामले पर सरकार के साथ एकजुटता दिखाई है।

तो पीएम मोदी ने भी सहयोगी दलों को आश्वस्त किया है कि नोटबंदी का श्रेय उनको नहीं, बल्कि उन सभी दलों को जाएगा जो फैसले पर सरकार के साथ खड़े हैं। संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार ने कहा कि इस मुद्दे पर पूरा राजग एकजुट है। 

संसद में विपक्ष के हमलों को तार-तार करने के लिए सरकार की रणनीति नोटबंदी का विरोध कर रहे सियासी दलों को कालाधन और कालाबाजारी वालों के हमदर्द के रूप में पेश करने की है। सरकार की ओर से नोटबंदी के कदम को कालाधन के खिलाफ बडे़ अभियान के रूप में पेश किया जाएगा।

शिवसेना नेता आनंद राव अडसूल ने कहा है कि संसद में विपक्ष को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए राजग के सभी दल एकजुट हैं। रामविलास पासवान की पार्टी लोजपा ने भी विपक्ष को करारा जवाब देने की बात कही है।
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