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सभी राज्यों को फिर से जारी की गई एनपीआर की अधिसूचना, केरल-पश्चिम बंगाल ने किया मना

Wed, 15 Jan 2020 04:43 PM IST
देव कश्यप न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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एनपीआर - फोटो : self
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नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी पर देश भर में मचे बवाल के बीच केंद्र सरकार ने सभी राज्यों को राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) की फिर से अधिसूचना जारी की है। वहीं केरल और पश्चिम बंगाल ने अपने राज्य में एनपीआर नहीं लागू करने की सूचना केंद्र को दे दी है।
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सरकारी सूत्रों के मुताबिक केंद्र सरकार ने बुधवार को सभी राज्यों को फिर से एनपीआर की सूचना जारी की है।
 



बता दें कि पहले से ही कई राज्य एनसीआर और एनपीआर को अपने राज्यों में नहीं लागू करने की बात कह चुके हैं। इनमें से ज्यादातर वैसे राज्य हैं जहां विपक्षी दलों की सरकार है। केंद्रीय मंत्रिमंडल से राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) को अनुमति मिलने के बाद गृहमंत्री अमित शाह ने कहा था कि इसका एनआरसी से संबंध नहीं है। साथ ही स्पष्ट किया था कि देश में एनआरसी पर कोई बात नहीं हो रही है। इस पर बहस की जरूरत नहीं है। अमित शाह ने कहा था कि अगर एनपीआर में किसी नागरिक का नाम नहीं दर्ज हो पाता है, तो इससे उसकी नागरिकता खत्म नहीं होगी।

अपने राज्यों की गरीब जनता को सरकारी योजनाओं से दूर न रखें
गैर-भाजपा सरकार वाले राज्यों के मुख्यमंत्रियों द्वारा एनआरसी और एनआरपी लागू करने से किए इनकार पर शाह ने कहा था कि मुख्यमंत्रियों को ऐसा कोई काम नहीं करना चाहिए, जिससे लोगों को दिक्कतें हों। उन्हाेंने कहा कि वे उन्हें समझाने का पूरा प्रयास करेंगे कि वे अपने राज्यों की गरीब आबादी को सरकारी योजनाओं से दूर नहीं रखें।

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एनपीआर कांग्रेस की पहल थी
शाह ने यह भी कहा था कि एनपीआर की प्रक्रिया कांग्रेस ने 2010 में शुरू की थी। 2004 में इसका कानून बनाया गया था। भाजपा ने इसे जनगणना के साथ जारी रखने का निर्णय लिया है, यह पार्टी के घोषणापत्र में नहीं था। वहीं उन्हाेंने साफ किया कि इसमें किसी का नाम शामिल नहीं होता है तो उसकी नागरिकता की वैधता पर प्रश्न नहीं उठेंगे, यह एनआरसी से अलग है।

शाह ने कहा था कि एनपीआर जनसंख्या का रजिस्टर है। इसके आधार पर अलग-अलग योजनाओं के आकार तय होते हैं। एनआरसी में हर व्यक्ति से साक्ष्य मांगा जाता है कि आप किस आधार पर भारतीय नागरिक हैं? दोनों प्रक्रियाओं का एक-दूसरे से कोई लेनादेना नहीं है और न ही दोनों एकदूसरे के सर्वे को अपने काम में ले सकते हैं। दोनों के लिए कानूनी आधार भी अलग अलग हैं।

एनपीआर की जरूरत इसलिए
उन्हाेंने कहा कि एनपीआर की जरूरत इसलिए है कि हर 10 साल में अंतरराज्यीय स्तर पर जनगणना में काफी बदलाव आ जाते हैं। नागरिक एक राज्य से दूसरे राज्य में जाकर बस जाते हैं। इन बदलावों के मुताबिक योजनाएं बनाने के लिए एनपीआर आधार होता है।

एप के जरिए जानकारी, साक्ष्य नहीं देना होगा
उन्हाेंने कहा कि एनपीआर के तहत भारत में रहने वाला हर कोई भी व्यक्ति एक एप में अपनी जानकारियां देगा। उसे इन जानकारियों के साक्ष्य के रूप में कोई दस्तावेज नहीं देना होगा। अगर किसी के पास कोई जानकारी नहीं है, तो उस जानकारी के स्थान को खाली छोड़ सकते हैं। इसमें यह नहीं पूछा जाएगा कि क्या आप भारत के नागरिक हैं? बल्कि घर के आकार, पशुधन, आदि जैसी जानकारियां ली जाएंगी। 

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