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यह बीमारी नहीं अवस्था है, इससे डरें नहीं...इसे हराएं

सार

  • दुनिया के करीब एक-तिहाई मनोरोगी भारत और चीन में हैं।  
  • हर पांचवां व्यक्ति मानसिक रूप से अस्वस्थ है।
  • मानसिक रोग के मुश्किल दौर से गुजरता भारत।
  • मानसिक स्वास्थ्य साक्षरता के घटक।
  • मानसिक स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता के लिए रोडमैप।
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मानसिक सेहत - फोटो : Amar Ujala

क्या आपका आत्मविश्वास कम हो रहा है, भूलने की आदत बढ़ गई है, बेवजह रोने का दिल करता है या फिर आप कुछ ज्यादा ही हंसते हैं। छोटी-छोटी बात पर डर लगने लगता है या फिर झगड़ा करने लगते हैं। कभी-कभी जिंदगी बेमतलब सी लगती है। सब खत्म करने का मन करता है। जल्दी और बेवजह गुस्सा आ जाता है। कुछ काम करने के लिए निकलते हैं और भूल जाते हैं कि क्या करना है।अगर आपके साथ ऐसा बार-बार होता है तो इन लक्षणों को नजरअंदाज बिलकुल भी मत करिए। हो सकता है कि आपको मानसिक रोग जकड़ रहा हो।  

विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के अनुसार दुनियां भर में लोग किसी न किसी मानसिक विकार से पीड़ित हैं, ऐसे लोगों की संख्या लगभग 450 मिलियन के करीब है। इसमें सबसे बड़ी संख्या अवसादग्रस्त लोगों की है जो करीब 350 मिलियन हैं। आंकड़ों के अनुसार,

  • हर पांचवां व्यक्ति मानसिक रूप से अस्वस्थ है।
  • हर 20वां व्यक्ति किसी न किसी गंभीर मानसिक रोग से ग्रस्त है।
  • बात साफ है कि ऐसे लोग सामान्यत: स्कित्जोफ्रेनिया या बाइपोलर डिसॉर्डर से परेशान हैं।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने वर्ष 2015 में लोकसभा में कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां दी थीं। इसमें देशभर में मनोचिकित्सक और उससे जुड़ी सुविधाओं के बारे में बताया गया था। हमारे देश में:
  • 3800 मनोचिकित्सक हैं
  • 898 क्लीनिकल मनोचिकित्सक हैं
  • 850 मनोवैज्ञानिक सामाजिक कार्यकर्ता है
  • 1500 मनोवैज्ञानिक नर्सें हैं
भारत में प्रति दस लाख लोगों पर लगभग एक मनोचिकित्सक है। जबकि कॉमनवेल्थ मानकों के अनुसार प्रति एक लाख लोगों पर 5.6 मनोचिकित्सक होने चाहिए।
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मानसिक रोग के मुश्किल दौर से गुजरता भारत

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क्या होता है मानसिक रोग? - फोटो : Amar Ujala
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार मानसिक स्वस्थ्य की परिभाषा यह है: 'स्वस्थ्य का मतलब है एक व्यक्ति का शारीरिक और मानसिक तौर पर स्वस्थ होना, ना की किसी बीमारी का ना होना'

मानसिक रोग के मुश्किल दौर से गुजरता भारत

  • डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2015 में भारत में पांच करोड़ मानसिक रोगी थे।
  • दक्षिण एशियाई देशों में सबसे ज्यादा डिप्रेशन के मरीज भारत में ही रहते हैं।
  • भारत में तीन करोड़ लोग एंग्जाइटी यानी घबराहट के शिकार हैं। एंग्जाइटी का शिकार व्यक्ति कई बार आत्महत्या जैसा कदम भी उठा लेता है।
  • डब्ल्यूएचओ के अनुसार 2005 से 2015 तक पूरी दुनिया में डिप्रेशन (अवसाद) के मरीजों की संख्या 18.4 प्रतिशत तक बढ़ चुकी है और दुनियाभर के 50 प्रतिशत लोग भारत और चीन में रहते हैं। 
  • पूरी दुनिया में होने वाली कुल मौतों में आत्महत्या की हिस्सेदारी 1.5 प्रतिशत है।
  • डिप्रेशन के 78 प्रतिशत मरीज निम्न और मध्यम आय वाले देशों में रहते हैं।
  • वर्ष 2012 में पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा आत्महत्याएं भारत में हुई थीं।
  • 2015 के मुकाबले 2016 में भारतीयों ने डिप्रेशन की दवाएं ज्यादा खायीं।
  • वर्ष 2015 के मुकाबले 2016 में डॉक्टरों ने एंटी डिप्रेशन दवाओं के 14 प्रतिशत पर्चे ज्यादा लिखे। (स्रोत डब्ल्यूएचओ रिपोर्ट)
साइकॉलजिस्ट (मनोचिकित्सक) डॉक्टर नीतू राणा कहती हैं, 'इन सभी चीजों को रोका भी जा सकता है, हालात संभाले जा सकते हैं, इलाज मुमकिन है, मगर जरूरत है बीमारियों को पहचानने की। अगर आपको याद नहीं कि आप आखिरी बार खुश कब थे।
  • बिस्तर से उठने या नहाने जैसे रोजमर्रा के काम भी आपको भारी लगता हो।
  • आप लोगों से बचने लगे हैं।
  • आप खुद से नफरत करते हैं और अपने आपको खत्म कर लेना चाहते हैं।
  • अगर आप इन बातों के अलावा गूगल पर खुदकुशी के तरीके सर्च करते हैं, जानने की कोशिश करते है तो आपको तुरंत मदद लेनी चाहिए।
डॉ. सोनाली का मानना है कि 'मेंटल हेल्थकेयर बिल पास होने के बाद डॉक्टरों को अपना काम करने में आसानी होगी क्योंकि मरीज की बीमारियां इंश्योरेंस में कवर होंगी तो उसको इलाज के लिए पैसों की चिंता करने की जरूरत नहीं होगी। उसके साथ कोई भी जबरदस्ती नहीं की जाएगी और अब वो जरूरत पड़ने पर वह कानूनी मदद भी ले सकेगा।'

डॉ अनीता मोराल, मनोचिकित्सक का मानना है कि "मानसिक स्वास्थ्य सम्पूर्ण स्वास्थ्य की रीढ़ निर्धारित करता है , शारीरिक स्वास्थ्य भी तभी साथ दे पाता है जब मानसिक स्वास्थ्य दुरुस्त हो , अतः रोज स्वयं से एक वादा अवश्य कीजिए, आपके और मेरे लिए पहले मानसिक शांति सर्वाधिक महत्वपूर्ण  एवं प्रिय है बाकी सब संसार गौण,सबसे अधिक महत्वपूर्ण है स्वस्थ रहना , शांत रहना , स्वयं में रहना ..किंतु यह तभी सम्भव है जब आपका मन मस्तिष्क आपके नियंत्रण में हो ...
अर्थात आप मानसिक रूप से स्वस्थ हों एवं मज़बूत हों ।"
 
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मानसिक स्वास्थ्य साक्षरता के घटक

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मानसिक स्वास्थ्य साक्षरता के घटक: - फोटो : Amar Ujala

मानसिक स्वास्थ्य साक्षरता के घटक:

  • मानसिक स्वास्थ्य की जानकारी कैसे प्राप्त की जाए
  • जानकारी खोजने में सही मदद कैसे ली जाए
  • पेशेवर मदद पर विश्वास
  • खुद की मदद करने में यकीन
  • मानसिक बीमारियों के कारणों की सही जानकारी
  • मानसिक परेशानी को समझने की क्षमता

मानसिक स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता के लिए रोडमैप

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मानसिक स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता के लिए रोडमैप - फोटो : Amar ujala
मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रही देश की बड़ी आबादी को इस समस्या से बचाने का एक मात्र रास्ता लोगों में इसके बारे में जागरूकता पैदा करना है। जागरूकता बढ़ने से इस तरह की समस्याओं की पहचान आसान होने के साथ ही उनका इलाज भी जल्द हो पाएगा। इसके अलावा लोग इन समस्याओं से बचने के उपाय भी अपनाएंगे। जागरूकता बढ़ने से राजनीतिक फंडिंग के साथ ही मिलकर प्रयास करना भी संभव होगा।

परंपरागत मीडिया, मानसिक स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता बढ़ाने में परंपरागत मीडिया काफी बढ़ी भूमिका निभा सकता है। सेलिब्रिटी द्वारा इन मामलों में सामने आने से भी चीजें बदलेंगी, जैसे- दीपिका पादुकोण ने हाल ही में अवसाद के बारे में अपने अनुभव शेयर किया, जिससे इससे प्रभावित लोगों में विश्वास का संचार हुआ। इन सबके अलावा, विज्ञापनों और डॉक्यूमेंट्री आदि से भी जागरूकता बढ़ाई जा सकती है।

भारत में इन्फ्रास्ट्रक्चर संबंधी कमियां हैं, हालांकि कम्युनिटी हेल्थ वर्कर्स के जरिए मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के बारे में आसानी से लोगों में जागरूकता फैलाई जा सकती है।
  • परंपरागत मीडिया।
  • इंटरनेट, सोशल मीडिया आदि
  • क्राउड सॉर्सिंग- इसका मतलब विभिन्न स्रोतों से साधन, धन या संसाधन जुटाना होता है
  • शैक्षिक व्यवस्था
  • उद्योग
  • सरकारी कार्यक्रम
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कैसे पहचानें कि कोई व्यक्ति मनोरोग की तरफ बढ़ रहा है

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कैसे पहचानें: ऐसे में आप कैसे समझें कि कोई व्यक्ति मनोरोग की तरफ बढ़ रहा है  - फोटो : Amar ujala
  • चिड़चिड़ापन रहना
  • ठीक से नींद न आना
  • कम भूख लगना
  • अपराध बोध होना
  • बिना वजह दुखी महसूस करना
  • हर समय उदास रहना
  • आत्मविश्वास में कमी
  • थकान महसूस होना और सुस्ती
  • उत्तेजना या शारीरिक व्यग्रता
  • मादक पदार्थों का सेवन करना
  • एकाग्रता में कमी
  • खुदखुशी करने का ख्याल आना
  • किसी काम में दिलचस्पी न लेना
  • व्यक्ति के मूलभूत व्यवहार में अंतर दिखायी देना
  • अकेले रहना, बातचीत से बचना
  • दो-चार हफ्तों से ज्यादा अगर ऐसा हो तो जरूर इस बात को गंभीरता से लेना चाहिए और उचित कदम उठाने चाहिए
  • बहुत ज्यादा आत्मकेंद्रित रहना
  • जरा-सी बात से भयभीत हो जाना और मन का बार बार बदलना
  • लगे कि जीवन में हर तरफ दुख ही दुख है
  • स्मरणशक्ति बहुत घट जाए
  • लोगों से अलग-थलग रहने की आदत
  • नींद और भूख में नाटकीय परिवर्तन दिखाई देना
  • एकाग्रता में कमी आना
  • दूसरों के प्रति अस्वाभाविक शक्कीपन बढ़ना
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मनोरोग के क्या हैं कारण

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कारण: मानसिक रोग - फोटो : Amar Ujala
  • शराब या ड्रग्स का प्रयोग
  • अच्छे रिश्तों का न होना
  • कोई पुरानी गंभीर मानसिक बीमारी
  • बचपन का कोई दुर्व्यवहार
  • मस्तिष्क में रासायनिक असंतुलन का हो जाना
  • आनुवंशिक समस्याएं
  • हिंसाऔर बलात्कार आदि का प्रभाव
  • लंबे समय तक चिंताग्रस्त रहना और किसी तनाव से गुजरना
  • किसी प्रियजन की मौत और उसका सदमा, कोई अप्रिय दुर्घटना, अपमान आदि के कारण तनाव में पड़ जाना और निरंतर उसके बारे में सोचते रहना
  • मस्तिष्क में चोट, संक्रमण की वजह से
  • हिंसाऔर बलात्कार आदि का प्रभाव
  • मानसिक रोग बहुत आम है प्रत्येक 5 वयस्कों में से 1 को मानसिक रोग कभी न कभी जरूर हुआ होता है
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मनोरोग से बचने के उपाय 

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मानसिक रोग - फोटो : Amar Ujala
यदि डिप्रेशन से बचना है तो सबसे पहले इस बारे में खुलकर बात करें। रोजमर्रा की जिंदगी में बदलाव करे और स्वयं को व्यवस्थित करे अपनेआप को समय दें।
यह होगा कैसे:
  • बात करें, मदद मांगें और प्रियजनों के संपर्क में रहें।
  • सेहतमंद खाना खाएं और रोजाना व्यायाम करें।
  • रचनात्मक कार्यों में मन लगाएं।
  • अच्छा संगीत और किताबों को दोस्त बनाएं।
  • नकारात्मक लोगों से दूरी बनाएं।
  • अपनी नींद पूरी करें।
  • वर्तमान में जिएं और पुरानी बातों के बारे में न सोचें।
  • खुद को लोगों से दूर न करें।
  • मनोचिकित्सक से सलाह लें और अवसाद को दूर भगाने के लिए खुलकर बात करें।

मानसिक रोग का उपचार

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मनोरोग से बचने के उपाय  - फोटो : Amar Ujala
अस्पताल में भर्ती होने की अवस्था (गंभीर हालत में)
मनोचिकित्सा के आधार पर (काउंसलिंग के आधार पर)
  • व्यक्तिगत चिकित्सा
  • पारस्परिक चिकित्सा
  • पारिवारिक चिकित्सा
  • कॉग्निटिव बिहेवियर थेरेपी
  • डायलेक्टिकल वर्चुअल थेरेपी
  • ग्रुप थेरेपी
निम्नलिखित जांच का सहारा भी लिया जा सकता है 
  • शारीरिक परिक्षण
  • मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन
  • लैब टेस्ट

ताकि मानसिक सेहत बनी रहे

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ताकि मानसिक सेहत बनी रहे - फोटो : Amar Ujala
  • दिन की शुरुआत सकारात्मक सोच के साथ करें
  • प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट की पर्याप्त मात्रा भोजन में लें
  • विटामिन-बी, सी, ई, के से भरपूर चीजें अपने भोजन में शामिल करें
  • ओमेगा-3 का सेवन करें। अखरोट,कनोला ऑयल, अलसी, आदि में यह प्रचुर मात्रा में होता है
  • ओमेगा-3 न्यूरोट्रांसमीटर सेरोटोनिन का स्राव करता है, जिससे हमारी सीखने और याद रखने की क्षमता और सतर्कता में वृद्धि होती है।
  • दूध व सलाद भरपूर खाएं
  • दही का सेवन करें, अमीनो एसिड तनाव को कम करता है
  • नवीन बातों को सीखने की आदत डालें, मस्तिष्क को सक्रिय रूप से कार्यकलापों में लगाए।
  • नृत्य, संगीत में रुचि लें
  • शतरंज, क्रॉसवर्ड, पहेलियां जैसे खेलों में अधिक से अधिक रुचि लें
  • शारीरिक कसरत के साथ मानसिक कसरत भी करें।
  • आंतर और बाह्य कुंभक प्राणायाम भी मस्तिष्क की क्षमता बढ़ाते हैं।
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डिप्रेशन आपको डरा सकता है मगर हरा नहीं सकता

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डिप्रेशन आपको डरा सकता है मगर हरा नहीं सकता।   - फोटो : Amar Ujala
  • सुबह योगासन-प्राणायाम जरूर करें।
  • कपालभाति, अनुलोम-विलोम, भस्त्रिका, भ्रामरी जरूर करें।
  • सकारात्मक सोच वालों से मित्रता करें।
  • 6-8 घंटे की अपनी नींद पूरी लें।
  • कम और ज्यादा नींद मानसिक परेशानियों का कारण होती है।
  • बच्चों के साथ बातें करें।
  • घूमने के लिए समय-समय पर जाएं।
भारत में मानसिक रोगों का इलाज करने वाले सिस्टम को पहले खुद का इलाज करना होगा, मगर शुरुआत अपने-आप से करें, हिम्मत नहीं हारें और अपनी जिंदगी से प्यार करें, डिप्रेशन आपको डरा सकता है मगर हरा नहीं सकता।

Source: Bibliography and References.

*Additional educational resources.
*Information for healthcare professionals.
*Information for patients and carers.

Mental Health Care (www.mentalhealthcare.org.uk/)—A collaboration between the Institute of Psychiatry and Rethink providing clinical and up to the minute research evidence on a wide range of mental health matters
EPPIC (www.eppic.org.au/index.asp)—Website produced by the EPPIC service in Melbourne with helpful advice and information sheets about the nature of first episode psychosis
Mental Health Care (www.mentalhealthcare.org.uk/)—A collaboration between the Institute of Psychiatry and Rethink providing clinical and up to the minute research evidence on a wide range of mental health matters
Royal College of Psychiatrists (www.rcpsych.ac.uk/mentalhealthinformation.aspx)—A series of articles aimed at professionals, carers, and patients that provides comprehensive information on a variety of mental health problems.

Mental Health Bibliography
*WHO Report.( Health Data and Index) 
"Investing in Mental Health"

https://www.who.int/mental_health/media/investing_mnh.pdf

Research Paper: Mental health awareness: The Indian scenario
Ogorchukwu JM, Sekaran VC, Nair S, Ashok L. Mental health literacy among late adolescents in South India: What they know and what attitudes drive them. Indian J Psychol Med. 2016;38:234–41
Brown VA, Harris JA, Russell JY. Tackling Wicked Problems through the Transdisciplinary Imagination. London: Earthscan; 2010. 

( Components of mental health literacy: Jorm)
Jorm AF. Mental health literacy. Public knowledge and beliefs about mental disorders. Br J Psychiatry. 2000;177:396–401. 
ROADMAP FOR MENTAL HEALTH AWARENESS.
Thirunavukarasu M. Closing the treatment gap. Indian J Psychiatry. 2011;53:199–201. 
Patel V, Goel DS, Desai R. Scaling up services for mental and neurological disorders in low-resource settings. Int Health. 2009;1:37–44. 
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