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सुप्रीम कोर्ट में अनुच्छेद 370 पर सुनवाई टली, सीजेआई ने दोबारा याचिका दायर करने को कहा

Fri, 16 Aug 2019 11:24 AM IST
शिल्पा ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला

सार

  • सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता वकील एम एल शर्मा से कहा यह किस तरह की याचिका है? 
  • सीजेआई ने कहा कि यह याचिका पढ़ने में 30 मिनट लगाए लेकिन इसका कोई मतलब नहीं पता चल सका।
  • हम जम्मू कश्मीर में मीडिया पर लगी पाबंदियां हटाने के मुद्दे पर थोड़ा और वक्त देना चाहेंगे : उच्चतम न्यायालय ।
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : PTI
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अनुच्छेद 370 से संबंधित सभी याचिकाओं को एक साथ सुना जाएगा। सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को अनुच्छेद 370 पर सुनवाई हुई। इस दौरान कोर्ट ने सुनवाई को टाल दिया। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने कहा है कि याचिका को दोबारा दायर किया जाए।

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दरअसल आज कोर्ट ने इस मामले पर दायर दो याचिकाओं पर सुनवाई की। जिसमें से पहली याचिका में अनुच्छेद 370 तो हटाए जाने का विरोध किया गया है। वहीं दूसरी याचिका में कश्मीर में पत्रकारों से सरकार का नियंत्रण हटाने की मांग की गई है।



जो पहली याचिका है, उसे वकील एमएल शर्मा ने दायर किया है। जिसमें कहा गया है कि अनुच्छेद 370 को हटाकर सरकार ने मनमानी की है। उसने इसके लिए संसदीय रास्ता नहीं अपनाया है। इस याचिका में राष्ट्रपति के आदेश को भी असंवैधानिक बताया गया है।
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शर्मा की याचिका पर सुनवाई करते हुए गोगोई ने उन्हें फटकार लगाते हुए कहा कि ये किस तरह की याचिका है। मुझे समझ ही नहीं आ रही है। उन्होंने फिर पूछा कि याचिकाकर्ता कैसी राहत चाहते हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि यह किस तरह की याचिका है? इसे खारिज किया जा सकता था, लेकिन रजिस्ट्री में पांच अन्य याचिकाएं भी हैं। सीजेआई ने कहा कि उन्होंने अनुच्छेद 370 पर दी गई यह याचिका पढ़ने में 30 मिनट लगाए लेकिन इसका कोई मतलब नहीं पता चल सका।

संपादक अनुराधा भसीन की याचिका

वहीं दूसरी याचिका को कश्मीर टाइम्स की संपादक अनुराधा भसीन ने दायर किया है। जिसमें कहा गया है कि अनुच्छेद 370 खत्म होने के बाद पत्रकारों पर लगाए गए नियंत्रण खत्म किए जाएं। इससे पहले दाखिल एक याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए कहा था कि जम्मू-कश्मीर का मामला संवेदनशील है। इसपर केंद्र सरकार को थोड़ा वक्त देना होगा।

केंद्र ने राज्य में मीडिया पर लगाई पाबंदियां हटाने की मांग करने वाली याचिका पर बताया कि जम्मू कश्मीर में दिन प्रतिदिन स्थिति में सुधार हो रहा है, पाबंदियां धीरे-धीरे हटाई जा रही हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम जम्मू कश्मीर में मीडिया पर लगी पाबंदियां हटाने के मुद्दे पर थोड़ा और वक्त देना चाहेंगे। कोर्ट ने कहा कि हमने पढ़ा कि लैंडलाइन कनेक्शन बहाल किए जा रहे हैं और हमें आज जम्मू कश्मीर उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की ओर से फोन भी आया। उच्चतम न्यायालय ने कोई तारीख तय किए बिना कहा कि हम मीडिया पर पाबंदियों के मामले पर अन्य संबंधित मामलों के साथ सुनवाई करेंगे।

बता दें केंद्र सरकार ने पांच अगस्त को जब ये फैसला लिया और जिस तरह दोनों सदनों में बिल पास हुआ। तभी से उसपर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। कांग्रेस सहित कुछ विपक्षी पार्टियों ने इस बिल और फैसले को गैर संवैधानिक बताया है। इन पार्टियों ने दावा किया है कि सुप्रीम कोर्ट में ये बिल आदेश नहीं टिकेगा। हालांकि कुछ संवैधानिक विशेषज्ञों का कहना है कि ये फैसला और इसे लागू करने की प्रक्रिया संवैधानिक है।

गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर में धारा 144 को लागू है। जिसके चलते सभी स्कूल और कॉलेज के अलावा मोबाइल इंटरनेट, मोबाइल कॉलिंग बंद हैं। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती, उमर अबदुल्ला, सज्जाद लोन सहित कई नेताओं को नजरबंद भी किया गया है। 

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