दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र में बीते लगभग ढाई महीनों से चल रहे आंदोलन और बेमियादी बंद के मुद्दे पर मंगलवार को यहां राज्य सरकार और पर्वतीय क्षेत्र के तमाम संगठनों के बीच आयोजित सर्वदलीय बैठक बेनतीजा ही रही।
अब अगली बैठक 12 सितंबर को दार्जिलिंग जिले के सिलीगुड़ी में होगी। यहां राज्य सचिवालय में शाम को घंटे भर चली बैठक के बाद ममता ने पत्रकारों से कहा कि पर्वतीय क्षेत्र के तमाम राजनीतिक दलों ने अलग गोरखालैंड के गठन की मांग उठाई थी।
लेकिन ममता ने यह कहते हुए इस मुद्दे पर कोई चर्चा नहीं की कि गोरखालैंड देना सरकार के वश में नहीं है। वैसे, उन्होंने इस बैठक को सकारात्मक करार दिया और कहा कि कम से कम इस मुद्दे पर बातचीत की प्रक्रिया तो शुरू हुई है।
दूसरी ओर, गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के नेता विनय तामंग ने बताया कि गोरखालैंड की मांग एक सदी से भी ज्यादा पुरानी है। हमने बैठक में यह मांग उठाई थी। इस पर सरकार ने भी अपना रुख साफ कर दिया है।
उन्होंने कहा कि दार्जिलिंग लौट कर सलाह-मशविरे के बाद भावी रणनीति तय की जाएगी। ममता ने कहा कि दार्जिलिंग से आए प्रतिनिधियों ने अलग राज्य की मांग उठाई थी। लेकिन हमने साफ कर दिया है कि ऐसा करना हमारे अधिकार क्षेत्र में नहीं है। उन्होंने कहा कि पर्वतीय इलाके के लोगों के लिए गोरखालैंड एक अहम मुद्दा है और इससे उनकी भावनाएं जुड़ी हैं। लेकिन राज्य सरकार की भी कुछ मजबूरियां हैं।
ममता ने दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र में बीते 15 जून से जारी बेमियादी बंद वापस लेने की अपील की। इस पर मोर्चा नेता विनय तामंग ने कहा कि केंद्रीय समिति में विचार-विमर्श के बाद ही इस मुद्दे पर कोई फैसला किया जाएगा।