मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन की अध्यक्षता में रविवार को केरल में सर्वदलीय बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में फैसला लिया गया कि राजनीतिक दलों के साथ-साथ धार्मिक और सांस्कृतिक संगठनों को भी प्रचार करने के अवसर से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। इसके साथ ही यह भी तय हुआ कि मालिकों की अनुमति से और यातायात को प्रभावित किए बिना निजी दीवारों या परिसरों में झंडे के पोल और विज्ञापन बोर्ड लगाए जा सकते हैं।
इस सर्वदलीय बैठक को केरल उच्च न्यायालय के कई आदेशों के मद्देनजर राजनीतिक और अन्य संगठनों की अनुमति के बिना फुटपाथ और सड़कों पर पोल या झंडा लगाने के खिलाफ आयोजित किया गया था। इस बैठक में राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता वीडी सतीसन, राज्य के कानून मंत्री पी राजीव और कई अन्य दलों के नेता भी शामिल थे।
बैठक में सभी दलों का विचार था कि राजनीतिक दलों के साथ-साथ धार्मिक और सांस्कृतिक संगठनों को भी प्रचार करने या अपने कार्यक्रम आयोजित करने के अवसर से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। साथ ही सार्वजनिक स्थानों पर झंडे और विज्ञापन नहीं लगाए जाने चाहिए।
इसको लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय ने एक विज्ञप्ति भी जारी की थी। इसमें कहा गया है कि इस तरह से वाहनों और पैदल यातायात में बाधा उत्पन्न होगी।विज्ञप्ति में कहा गया है कि यह निर्णय लिया गया कि मालिकों की अनुमति से और यातायात को प्रभावित किए बिना निजी दीवारों या परिसरों में झंडे के खंभे लगाए जा सकते हैं।
पार्टियों ने बैठक में निर्णय लिया गया कि फुटपाथ आदि पर सम्मेलनों और त्योहारों के लिए संबंधित अधिकारियों की अनुमति लेनी जरूरी होगी और पैदल चलने वालों के रास्ते में बाधा डाले बिना झंडे और कार्यक्रम किये जा सकते है। साथ ही यह भी पहले से ही बताना होगा कि झंडे के खंभे कितने दिनों तक मौजूद रहेंगे और कार्यक्रम समाप्त होने के बाद उन्हें कब हटाया जाएगा।
पार्टियों ने महाधिवक्ता को बैठक में लिए गए निर्णयों के बारे में जनता की राय के रूप में उच्च न्यायालय को सूचित करने का निर्देश दिया।उच्च न्यायालय ने अवैध झंडे के खंभे लगाने के खिलाफ आदेश एक सहकारी समिति की याचिका पर दिया था। इस याचिका में आरोप लगाया गया था कि एक विशेष राजनीतिक दल अवैध रूप से जमीन पर झंडे और बैनर लगा रहा था।
पिछले साल 1 नवंबर को इस संदर्भ में अदालत ने एक अंतरिम आदेश पारित किया। इसमें निर्देश दिया गया था कि राज्य में कोई भी अवैध झंडा पोल या मस्तूल नहीं लगाया जाए, जब कोर्ट इसकी जांच कर रहा हो। कोर्ट ने पिछले साल 15 नवंबर को लोगों को अवैध झंडे के खंभों को हटाने के लिए 10 दिनों का समय दिया था और 25 नवंबर, 2021 को सरकार को राज्य में 42,337 फ्लैग मास्ट के खिलाफ भूमि संरक्षण अधिनियम के प्रावधानों को लागू करने का निर्देश दिया था।
इसके बाद पिछले साल दिसंबर में कोर्ट ने राज्य के सभी जिला कलेक्टरों को अवैध फ्लैग मास्टों के खिलाफ भूमि संरक्षण अधिनियम के तहत कार्रवाई करने का निर्देश दिया था।