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SIR पर 2 नवंबर को सर्वदलीय बैठक: स्टालिन का एलान- मताधिकार से वंचित करने का करेंगे विरोध, वोट चोरी को हराएंगे

Mon, 27 Oct 2025 10:41 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई

सार

चुनाव आयोग की तरफ से देशव्यापी एसआईआर का एलान कर दिया गया है। वहीं तमाम विपक्षी की तरफ से इसका विरोध किया जा रहा है, वहीं डीएमके सुप्रीमो और तमिलनाडु के सीएम स्टालिन ने 2 नवंबर को सर्वदलीय बैठक का आह्वान किया है, इसे लेकर उन्होंने कहा कि मताधिकार से वंचित करने का विरोध करेंगे, वोट चोरी को हराएंगे।
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तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन - फोटो : PTI
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विस्तार
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तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) अध्यक्ष एम.के. स्टालिन ने सोमवार को कहा कि राज्य में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर 2 नवंबर को सभी दलों की बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में आगे की रणनीति तय की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि चुनाव आयोग की तरफ से हाल ही में 12 राज्यों में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण की घोषणा की गई है, जिसमें तमिलनाडु भी शामिल है। सीएम स्टालिन सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, 'हम मताधिकार छीनने की किसी भी कोशिश का विरोध करेंगे और वोट चोरी को नाकाम करेंगे।'
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स्टालिन ने चुनाव आयोग पर लगाया साजिश का आरोप
उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव से कुछ महीने पहले और मानसून के दौरान एसआईआर कराना व्यावहारिक रूप से मुश्किल है। उन्होंने कहा, 'इतनी जल्दबाजी और अपारदर्शिता में यह प्रक्रिया कराना, दरअसल, चुनाव आयोग की साजिश है ताकि लोगों के अधिकार छीनकर भाजपा को फायदा पहुंचाया जा सके।'
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बिहार एसआईआर को लेकर सीएम स्टालिन का दावा
सीएम स्टालिन ने दावा किया कि बिहार में एसआईआर के दौरान बड़ी संख्या में महिलाओं, अल्पसंख्यकों और अनुसूचित जाति-जनजाति के लोगों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। उन्होंने कहा, 'इससे लोगों के बीच गंभीर संदेह पैदा हुआ है।' मुख्यमंत्री ने कहा, 'मतदान का अधिकार लोकतंत्र की नींव है। तमिलनाडु इस अधिकार को खत्म करने की किसी भी कोशिश का डटकर मुकाबला करेगा और जीतेगा।'

'भाजपा सरकार लगातार लोकतंत्र को कमजोर कर रही'
डीएमके की ओर से जारी एक बयान में कहा गया कि केंद्र की भाजपा सरकार लगातार लोकतंत्र को कमजोर कर रही है और स्वतंत्र संस्थाओं पर दबाव बना रही है। पार्टी ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की गतिविधियां संदेहास्पद और विवादास्पद बन चुकी हैं। बयान में कहा गया, 'चुनाव आयोग का काम पारदर्शी और निष्पक्ष चुनाव कराना है, लेकिन हाल के चुनावों में उसकी भूमिका संदिग्ध रही है। बिहार में हुआ एसआईआर इसका ताजा उदाहरण है, जहां असली मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए।' डीएमके ने यह भी कहा कि तमिलनाडु में उत्तर-पूर्व मानसून के दौरान इतनी बड़ी कवायद कराना अव्यवहारिक है। बयान में कहा गया, 'जब अप्रैल में चुनाव होने वाले हैं, तब इतनी जल्दीबाजी क्यों? हम इस प्रक्रिया का विरोध करते हैं।' 

सीपीआई ने किया विरोध, AIADMK ने किया स्वागत
इस बीच, सीपीआई राज्य सचिव वीरापांडियन ने कहा कि उनकी पार्टी तमिलनाडु में किसी भी मतदाता का नाम सूची से हटाने नहीं देगी। उन्होंने कहा, 'यह बिहार नहीं है, यह तमिलनाडु है। हम किसी को भारत की एकता को कमजोर करने नहीं देंगे।' वहीं, विपक्षी एआईएडीएमके ने एसआईआर का स्वागत किया और कहा कि यह प्रक्रिया पारदर्शी और व्यवस्थित ढंग से होनी चाहिए। पूर्व मंत्री डी. जयकुमार ने कहा, 'वर्तमान मतदाता सूची में जो गड़बड़ियां हैं, उन्हें सुधारा जाना चाहिए।'

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भाजपा का सीएम स्टालिन पर पलटवार
भाजपा नेता और पूर्व राज्यपाल डॉ. तमिलिसाई सुंदरराजन ने भी एसआईआर का समर्थन करते हुए कहा कि 'मुख्यमंत्री को मानसून की चिंता करनी चाहिए, न कि एसआईआर की।' उन्होंने पूछा, 'डीएमके सरकार एसआईआर से डर क्यों रही है?' तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन ने कहा कि एसआईआर की प्रक्रिया नेहरू युग से चली आ रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि 'स्टालिन इसका विरोध क्यों कर रहे हैं? क्या उन्हें चुनावी हार का डर है?

सीएम स्टालिन ने विपक्ष पर लगाए थे आरोप
इससे पहले, 26 अक्तूबर को स्टालिन ने एक पत्र में पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा था कि भाजपा और एआईएडीएमके मिलकर एसआईआर के जरिए लोगों के मताधिकार छीनने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि बिहार में 65 लाख लोगों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। स्टालिन ने लिखा, 'भाजपा और उसकी सहयोगी एआईएडीएम के यह मान बैठी हैं कि वे मेहनतकश वर्ग, दलितों, अल्पसंख्यकों और महिलाओं के नाम हटाकर चुनाव जीत सकती हैं। लेकिन यह उनकी सबसे बड़ी भूल साबित होगी।'

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