बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के संस्थापक मदन मोहन मालवीय के जीवन का संपूर्ण वाङ्मय प्रकाशित करने का काम मालवीय मिशन की अगुवाई में लगातार चल रहा है। वाङ्मय 22 से ज्यादा खंडों में प्रकाशित किया जाएगा। हर एक खंड के लिए संपादकों का एक मंडल बनाया गया है। रविवार को संघ के सह सरकार्यवाह कृष्णगोपाल की अगुवाई में संपादकों की एक बैठक आयोजित हुई जिसमें सभी संपादकों ने अपने-अपने खंडों का ब्योरा पेश किया।
बैठक में संपूर्ण वाङ्मय के वेब पेज का भी उद्घाटन किया गया। इसे
www.malaviyamission.org/vangmay पर देखा जा सकता है। अभी यह हिंदी भाषा में उपलब्ध है जिसे गैर हिंदी भाषी पाठकों के लिए शीघ्र ही अंग्रेजी भाषा में भी उपलब्ध कराया जाएगा। इस पर महामना मदन मोहन मालवीय के जीवन के एक-एक दिन की गतिविधि और उनके किए कामकाज का ब्योरा पेश किया जाएगा।
संपूर्ण वाङ्मय समिति के सदस्य डॉक्टर उपेंद्र 'अयोध्या' ने बताया कि सामान्य लोग मदन मोहन मालवीय को बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के द्वारा ही जानते हैं, जबकि उनका जीवन बहुत विस्तृत है। यह वर्तमान की अनेक समस्याओं का समाधान प्रस्तुत करने वाला है। इसलिए मालवीय मिशन के अंतर्गत उनके सभी भाषणों, संसदीय भाषणों, लेखों और पत्रों का एक संकलन पेश करने का प्रयास चल रहा है। इसके लिए सभी देश-विदेश के लोगों से अपील की गई है कि अगर उनके पास मालवीय जी से जुड़ी कोई प्रामाणिक दस्तावेज हैं तो वे उन्हें संपूर्ण वाङ्मय समिति से साझा करें। जिससे पूरी दुनिया के लिए इसे उपलब्ध कराया जा सके।
संपूर्ण वाङ्मय समिति में शोधकर्ता गुंजन अग्रवाल ने अमर उजाला को बताया कि मदनमोहन मालवीय ने अनेक कार्यों से 30 से ज्यादा रजवाड़ों से लिखित संवाद स्थापित किया था। इन रजवाड़ों ने मालवीय जी के पत्रों को हमसे साझा करने पर सहमति जताई है। इसी प्रकार विदेश की कई लाइब्रेरी और संसदीय कार्यालयों से भी संपर्क किया जा रहा है। इसी प्रकार अभ्युदय, सनातन धर्म, हिंदोस्थान, द यूनियन, विश्व पंचांग, केसरी, लीडर जैसी पत्र-पत्रिकाओं में उनके लेख बहुमूल्य हैं। इन्हें संपूर्ण वाङ्मय में विस्तृत रूप से स्थान दिया जाएगा।