मुस्लिम संगठनों ने बृहस्पतिवार को न सिर्फ समान नागरिक संहिता के खिलाफ एकजुटता दिखाई बल्कि उनके निशाने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार भी रही। सर्जिकल स्ट्राइक के बाद देश में घूम-घूम कर श्रेय बटोर रही केंद्र सरकार पर बोर्ड ने उस पर देश की सरहद को महफूज नहीं रख पाने की तोहमत जड़ दी और कहा कि सरकार देश में ही जंग छेड़ने की फिराक में है। बोर्ड ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि वह इस जंग में पीछे नहीं हटेगा।
मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के साथ जुटे सभी मुस्लिम तंजीमों के तेवर मोदी और उनकी केंद्र सरकार को लेकर तल्ख दिखे। उन्होंने इस मुद्दे को अकेले मुस्लिमों से जोड़कर देखने के बजाय सभी अल्पसंख्यकों के साथ मिलकर केंद्र से लड़ाई को आगे बढ़ाने की रणनीति बनाई। संकेत दिए कि जल्द ही इस मुदद्े पर सिख, ईसाई, दलित समेत अन्य वर्ग बोर्ड के साथ दिखेंगे और सरकार की संविधान विरोधी मंशा के खिलाफ आवाज बुलंद करेंगे। उनकी नाराजगी का आलम यह था कि वे यहां तक कह गए कि भारत में तानाशाही की जगह नहीं हैं। केंद्र सरकार और पीएम देश की सरहद को महफूज नहीं कर पा रहे और समान नागरिक संहिता जैसे मुद्दे छेड़कर देश के भीतर जंग छेड़ने की फिराक में लगे हैं।