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समान नागरिक संहिताः मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड केंद्र से आरपार की जंग को तैयार

Fri, 14 Oct 2016 01:23 AM IST
शादाब रिजवी/अमर उजाला, नई दिल्ली
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मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड
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मुस्लिम संगठनों ने बृहस्पतिवार को न सिर्फ समान नागरिक संहिता के खिलाफ एकजुटता दिखाई बल्कि उनके निशाने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार भी रही। सर्जिकल स्ट्राइक के बाद देश में घूम-घूम कर श्रेय बटोर रही केंद्र सरकार पर बोर्ड ने उस पर देश की सरहद को महफूज नहीं रख पाने की तोहमत जड़ दी और कहा कि सरकार देश में ही जंग छेड़ने की फिराक में है। बोर्ड ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि वह इस जंग में पीछे नहीं हटेगा। 
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मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के साथ जुटे सभी मुस्लिम तंजीमों के तेवर मोदी और उनकी केंद्र सरकार को लेकर तल्ख दिखे। उन्होंने इस मुद्दे को अकेले मुस्लिमों से जोड़कर देखने के बजाय सभी अल्पसंख्यकों के साथ मिलकर केंद्र से लड़ाई को आगे बढ़ाने की रणनीति बनाई। संकेत दिए कि जल्द ही इस मुदद्े पर सिख, ईसाई, दलित समेत अन्य वर्ग बोर्ड के साथ दिखेंगे और सरकार की संविधान विरोधी मंशा के खिलाफ आवाज बुलंद करेंगे। उनकी नाराजगी का आलम यह था कि वे यहां तक कह गए कि भारत में तानाशाही की जगह नहीं हैं। केंद्र सरकार और पीएम देश की सरहद को महफूज नहीं कर पा रहे और समान नागरिक संहिता जैसे मुद्दे छेड़कर देश के भीतर जंग छेड़ने की फिराक में लगे हैं। 
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मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड
बोर्ड के नाराज सदस्यों ने यहां तक चेताया कि मुसलमानों के विरोध को दरकिनार करना ठीक नहीं होगा। उन्होंने लॉ कमीशन के 16 सवालों पर राय नहीं देने के साझा एलान किया और अपना सवालनामा जारी कर उसके समर्थन में जनमानस को जोड़ने की रणनीति का खुलासा किया। संकेत दिए कि इस मुद्दे पर लाखों लोगों का समर्थन हासिल कर उसे एक बड़े प्लेटफॉर्म पर पेश किया जाएगा। पर्सनल लॉ बोर्ड की पूरी कोशिश है कि सारे मुस्लिम संगठन एक तरह से मजबूत मोर्चा होने का संदेश दे और पुरजोर तरीके से सरकार के खिलाफ आवाज बुंलद करें। इसके लिए शहरों, कस्बों और गांवों में जगह-जगह जलसे आदि कर सरकार की इस्लाम विरोधी मंशा की जानकारी लेकर समर्थन हासिल किया जाए।
 
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना मोहम्मद वली रहमानी ने कहा, 'समान नागरिकक संहिता को हम खारिज करते हैं। सरकार की मंशा को पूरा नहीं होने देंगे। इसके लिए आंदोलन को किसी भी स्तर तक ले जाएंगे। केंद्र सरकार की नीयत साफ नहीं हैं। बाकी वर्ग भी जल्द उनके समर्थन में खड़े दिखाई देंगे।'
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