देश के कर ढांचे में सुधार के लिए मंगलवार को आम सहमति से राज्यसभा में जीएसटी बिल पास हो गया है। इसके बाद केंद्र सरकार लोकसभा की सहमति जुटाएगी। कई और विधायी प्रक्रिया पूरी होने और नियम-कानून को अंतिम रूप देने के बाद अगले साल 1 अप्रैल से जीएसटी लागू हो सकता है। इससे विभिन्न सामान और सेवाओं के लिए देश को एक बाजार बनाने वाले जीएसटी में कई करें मिला दी जाएंगी। इनकी जगह सिर्फ तीन तरह के टैक्स सेट्रल गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (सीजीएसटी), स्टेट गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (एसजीएसटी) और इंटिग्रेटेड गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (आईजीएसटी) लगेगी।
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सीजीएसटी के अंतर्गत सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी, सर्विस टैक्स, एडिशनल कस्टम ड्यूटी, स्पेशल एडिशनल कस्टम ड्यूटी, सेंट्रल सेल्स टैक्स के साथ कई तरह के सरचार्ज और सेस मिल जाएंगे।
एसजीएसटी में राज्य सरकारों की ओर से लगने वाले वैल्यू एडेड टैक्स (वैट), ऑक्ट्रॉय और इंट्री टैक्स, परचेज टैक्स, लग्जरी टैक्स, लॉटरी पर लगने वाले टैक्स के साथ-साथ तमाम सेस और सरचार्ज मिल जाएंगे।
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दो राज्यों के बीच होने वाले कारोबार पर आईजीएसटी लगेगा।
शराब, पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और रसोई गैस को भी फिलहाल जीएसटी से बाहर रखने का फैसला किया गया है। केंद्र और राज्य सरकारें दोनों उन पर टैक्स लगाती रहेगी। हालांकि, केंद्र ने राज्यों को जीएसटी लागू होने की सूरत में किसी भी तरह के नुकसान की पूरी-पूरी भरपाई 5 साल करने का प्रस्ताव दिया है। वहीं एक फीसदी के अतिरिक्त टैक्स का प्रस्ताव भी वापस ले लिया है।
राज्यसभा में मुहर लगने के बाद भी होंगी कई प्रक्रियाएं
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जीएसटी पर राज्यसभा से संविधान संशोधन विधेयक पारित होने के बाद भी कई प्रक्रियाएं होंगी, जिसनें तीन कानून बनने के साथ-साथ जीएसटी काउंसिल का गठन होना शामिल है। इसके बाद इसपर लोकसभा की भी मंजूरी जुटानी होगी। संविधान संशोधन विधेयक को कम से कम 15 राज्यों के विधानसभाओं से अनुमोदित होने के बाद राष्ट्रपति की मुहर लगेगी।
संविधान में फेरबदल के बाद वित्त मंत्री की अगुवाई में जीएसटी काउंसिल का गठन होगा। ये काउंसिल जीएसटी की दर और नई टैक्स व्यवस्था में विवादों का निपटारा करेगी।
मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यिन दे चुके हैं सुझाव
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केंद्र सरकार सीजीएसटी और आईजीएसटी के लिए दो कानून बनाने की तैयारी में है। वहीं, राज्य सरकारें एसजीएसटी यानी स्टेट गुड्स एंड सर्विजेस टैक्स के लिए अपने-अपने यहां कानून बनाएंगी। इन सब के बाद जीएसटी के लिए नियमों को अंतिम रूप दिया जाएगा।
मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यिन की रिपोर्ट के मुताबिक, सामान और सेवाओं के लिए स्टैंडर्ड रेट 17 से 18 फीसदी रखने का सुझाव दिया गया है। अगर समिति की सिफारिशें पूरी तरह से मान ली जाए तो सर्विस टैक्स की दर 17 से 18 फीसदी के बीच हो सकती है। अभी दो तरह के सेस को मिलाकर सर्विस टैक्स की दर 15 फीसदी है।
GST लागू होने के बाद मलेशिया-ऑस्ट्रेलिया में बढ़ी थी महंगाई
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मोबाइल बिल पर अब तक जहां पूरे सर्विस चार्ज पर सर्विस टैक्स लगता है, वहीं रेस्त्रा में खाने के बिल के 40 फीसदी हिस्से पर ही सर्विस टैक्स लगता है। बाजार में कोई भी सामान खरीदने पर टैक्स देना पड़ता है। एक ही सामान पर कई बार टैक्स देना पड़ता है और वो भी पहले से लगाए टैक्स के ऊपर।
जानकार इस बात पर सहमत हैं कि जीएसटी लागू होने के बाद कुछ समय तक मलेशिया और ऑस्ट्रेलिया की तरह खुदरा महंगाई दर में बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि, जीएसटी की शुरुआती दिक्कतें खत्म होने के बाद महंगाई में भी कमी आई।
जीडीपी में हो सकती है 2% की बढ़ोत्तरी
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जानकार जीएसटी लागू होने के बाद जीडीपी में दो परसेंट तक की बढ़ोत्तरी की उम्मीद जता रहे हैं। दूसरी ओर आम लोगों के साथ-साथ उद्योग और कारोबार के लिए भी टैक्स व्यवस्था बेहद सरल हो जाएगी।
उम्मीद की जा रही है कि कम से कम 10 लाख रुपये से ज्यादा कारोबार करने वालों को ही नई व्यवस्था के दायरे में लाया जाएगा।
बताया जा रहा है कि नई व्यवस्था में 10 लाख रुपए से लेकर 1.5 करोड़ रुपए तक का कारोबार करने वालों पर राज्य सरकार की व्यवस्था चलेगी। वहीं, 1.5 करोड़ रुपए से ज्यादा के कारोबार करने वालों पर केंद्र और राज्य सरकारें, दोनों की व्यवस्था चलेगी। नई व्यवस्था से पूरा देश एक बाजार बन जाएगा और इज ऑफ डूइंग बिजनेस की तरफ एक अहम कदम का फायदा पूरे उद्योग को मिलेगा।