मालेगांव ब्लास्ट के आरोप में लगभग 9 साल जेल में गुजारने के बाद लेफ्टिनेंट कर्नल श्रीकांत पुरोहित आज जेल से रिहा हो गए। 29 सितंबर 2008 को मालेगांव में हुए बम ब्लास्ट के केस में आरोपी कर्नल पुरोहित की जमानत सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मंजूर कर ली थी। NIA ने शीर्ष अदालत में पुरोहित को जमानत देने का विरोध किया। उसका कहना था कि लेफ्टिनेंट कर्नल श्रीकांत पुरोहित को दोषी ठहराने के पर्याप्त कारण हैं। सुप्रीम कोर्ट मामले के अन्य प्रमुख आरोपियों साध्वी प्रज्ञा ठाकुर और असीमानंद को भी जमानत दे चुका है।
मिलिट्री इंटेलीजेंस में कर दिया गया शिफ्ट
पुणे में जन्में श्रीकांत पुरोहित का जन्म ब्राह्मण परिवार में हुआ। श्रीकांत के पिता बैंक में नौकरी करते थे उनकी एजुकेशन पुणे में ही हुई। 1994 में पुरोहित को मराठा लाइट इन्फेन्ट्री के लिए सलेक्ट किया गया था। जम्मू-कश्मीर में काम करते वक्त वो बीमार हो गए, जिस वजह से उन्हें मेडिकली डाउनग्रेड कर दिया गया। इस वक्त उन्हें मिलिट्री इंटेलीजेंस में शिफ्ट किया गया।
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2002 और 2005 के बीच जम्मू-कश्मीर में पुरोहित बेहद महत्वपूर्ण आतंक-विरोधी ऑपरेशन का हिस्सा बने। इस वक्त उन्हें MI-25 इंटेलीजेंस फील्ड सिक्योरिटी यूनिट में तैनाती मिली। इस यूनिट की जिम्मेदारी बॉर्डर के आस-पास दुश्मन पर नजर रखना होता है। कहा जाता है कि नासिक के नजदीक दिओली में लाइसन यूनिट ऑफीसर रहते वक्त वो रिटायर्ड मेजर रमेश उपाध्याय के संपर्क में आए।