नशा मुक्ति अभियान के तहत देश में साइकोट्रोपिक दवाओं के अवैध उपयोग को कम करने के लिए केंद्र सरकार ने सभी राज्यों से सख्त कदम उठाने का आदेश दिया है। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने कहा है कि डॉक्टर की पर्ची के बिना इन दवाओं की बिक्री नहीं होनी चाहिए। गुणवत्तापूर्ण दवाएं सुनिश्चित करने के लिए नियामक मानकों को मजबूत करना बहुत जरूरी है। इसके लिए सभी राज्यों को मिलकर सख्त कदम उठाने चाहिए।
सभी राज्यों के दवा नियामकों के साथ एक बैठक में उन्होंने कहा कि देश में केवल गुणवत्तापूर्ण और प्रभावी दवाएं ही प्रचलन में रहें, यह सुनिश्चित करने के लिए नियामक मानकों को मजबूत करने की आवश्यकता है। बैठक के दौरान श्रीवास्तव ने राज्य औषधि विनियामकों को आदेश दिया है कि दवाइयां केवल नुस्खों के माध्यम से ही बेची जाएं ताकि मादक दवाओं का तस्करी या अन्य अवैध उपयोगों के लिए उपयोग न किया जा सके। इस बीच अधिकारियों ने उन्हें बताया कि 905 दवा निर्माण और परीक्षण फर्मों की जांच के बाद अब तक 694 कार्रवाई की गई हैं।
इस बीच देश के ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) ने दर्द निवारक दवाओं टैपेंटाडोल और कैरीसोप्रोडोल के सभी संयोजनों के उत्पादन और निर्यात पर प्रतिबंध लगाए जाने की जानकारी देते हुए कहा कि इन दवाओं के अस्वीकृत संयोजनों को मुंबई स्थित एक फर्म द्वारा पश्चिम अफ्रीकी देशों में निर्यात किया था, जिससे वहां ओपिओइड संकट पैदा हो गया था।