केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने शनिवार को बच्चों में कोरोना संक्रमण की पहचान के लिए अभिभावकों के लिए दिशा-निर्देश जारी किया है। मंत्रालय का कहना है कि अभिभावक बच्चों की कुछ चीजों पर ध्यान रखेंगे तो संक्रमण की पहचान जल्दी हो सकेगी। इसके अलावा बच्चों कोरोना संक्रमण के कारण गंभीर स्थिति में जाने से बचाया जा सकेगा सकेगा।
बच्चों में ये दवाएं कारगर नहीं
एंटीवायरल दवाएं जैसे हाइड्रो ऑक्सिक्लोरोक्वीन, फेविपिराविर, आईवरमेक्टिन, रेमडेसिविर, यूमिफेनोविर, इंटरफेरॉन, प्लाजमा, डेक्सामेथासोन
जल्दी संक्रमण पता चलेगा तो इलाज आसान होगा
स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि संक्रमण की चपेट में आने वाले कुछ बच्चे बिना लक्षणों के हो सकते हैं वहीं कुछ बच्चों को बुखार खांसी सांस लेने में तकलीफ थकान मांस पेशी में दर्द नाक बहना गले में खराश डाल दिया स्वाद और सुगंध का चले जाना जैसे लक्षण दिखते हैं कुछ बच्चों ने पांच अन्य पेट संबंधी तकलीफ हो सकती है।
अभिभावक इन बातों का रखें ध्यान
माइल्ड लक्षण वाले बच्चों का इलाज
बुखार के लिए पेरासिटामोल 15 एमजी हर 4 से 6 घंटे पर। खांसी के लिए गरारा, तरल पदार्थ और पौष्टिक आहार दें।
मॉडरेट लक्षण वाले बच्चों का इलाज
गंभीर लक्षण वाले बच्चों का इलाज
जिनका ऑक्सीजन लेवल 90 से कम है। सीना तेजी के साथ फूला रहा है। थकान सुस्ती और दौरे हैं। ऐसे लक्षण वाले बच्चों का इलाज अस्पताल के एचडीयू और आईसीयू में ही कराना चाहिए।
गंभीर संक्रमित बच्चों में यह जांच जरूरी
मंत्रालय के अनुसार, ऐसे बच्चों में खून का थक्का, सूजन और अंग फेल होने से जुड़ी जांच जरूरी है। ब्लड काउंट, लिवर और किडनी फंक्शन टेस्ट के साथ एक्सरे जांच अनिवार्य है।