फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

चिंताजनक: 2060 तक सालाना 100 करोड़ टन पैदा होगा प्लास्टिक कचरा, जीवों के साथ इंसानों के लिए भी घातक

Sat, 05 Apr 2025 04:36 AM IST
निर्मल कांत अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली।

सार

वैश्विक स्तर पर प्लास्टिक कचरा 2060 तक 35.3 करोड़ टन से बढ़कर 101.4 करोड़ टन हो सकता है, जिससे पर्यावरण, जीव-जंतुओं और इंसानों को गंभीर खतरा पैदा हो जाएगा। माइक्रोप्लास्टिक फसलों, पानी, हवा और इंसान के फेफड़ों में पहुंचकर स्वास्थ्य पर भी असर डाल सकता है।
विज्ञापन
प्लास्टिक कचरा - फोटो : एएनआई (फाइल)
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

आने वाले दशकों में प्लास्टिक कचरे की मात्रा खतरनाक स्तर पर पहुंच सकती है। 2019 में जहां वैश्विक स्तर पर हर साल 35.3 करोड़ टन प्लास्टिक कचरा पैदा हो रहा था, वह 2060 तक तीन गुना बढ़कर 101.4 करोड़ टन हो सकता है। यह चौंकाने वाले आंकड़े आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (ओआईसीडी) की रिपोर्ट 'ग्लोबल प्लास्टिक आउटलुक : पॉलिसी सिनेरियोज टू 2060' में सामने आए हैं।

विज्ञापन


रिपोर्ट के अनुसार इस कचरे का लगभग आधा हिस्सा लैंडफिल में डंप किया जाता है, जबकि 20 फीसदी से भी कम प्लास्टिक को पुनर्नवीनीकरण किया जाता है। इसका नतीजा यह है कि प्लास्टिक प्रदूषण दुनियाभर में तेजी से फैल रहा है। यहां तक कि दुनिया के उन दूरदराज और निर्जन इलाकों में भी प्लास्टिक के अवशेष मिले हैं, जहां इंसानों का कोई सीधा प्रभाव नहीं पड़ा है। रिपोर्ट के अनुसार पैकेजिंग, कंस्ट्रक्शन, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, टायर और रोजमर्रा की जरूरतों से लेकर औद्योगिक क्षेत्रों तक इसका व्यापक उपयोग किया जा रहा है। यही हाल रहे तो 2060 तक उत्तरी अमेरिका, यूरोप और पूर्वी एशिया में प्लास्टिक की खपत दोगुनी हो जाएगी। तेजी से विकसित हो रही अर्थव्यवस्थाओं में यह 3 से 5 गुना तक बढ़ सकती है। उप सहारा अफ्रीका में प्लास्टिक की मांग 6 गुना तक बढ़ने की संभावना है।

ये भी पढ़ें: उत्तर पश्चिम भारत में छह दिन लू, हिमाचल से हरियाणा तक आसमान से बरसेगी आग; दक्षिण भारत में बारिश
विज्ञापन


तेजी से बढ़ रहा कार्बन उत्सर्जन...
1950 से अब तक करीब 830 करोड़ टन प्लास्टिक उत्पादित किया जा चुका है, जिसमें से 60 फीसदी कचरे के रूप में लैंडफिल या खुले वातावरण में फेंक दिया गया है। इस बढ़ती खपत का असर केवल कचरे तक सीमित नहीं है बल्कि प्लास्टिक उत्पादन से होने वाले कार्बन उत्सर्जन में भी तेज वृद्धि दर्ज की जा रही है।
विज्ञापन


बेहद खतरनाक हालात
प्लास्टिक कचरा न सिर्फ जीव-जंतु, पर्यावरण के लिए बल्कि इंसानों के लिए भी खतरनाक है। यह कचरे से निकलने वाले माइक्रोप्लास्टिक वायुमंडल में छह दिनों तक रह सकते हैं और इस दौरान कई महाद्वीपों की यात्रा कर सकते हैं। फसलों, पानी और हवा के जरिए प्लास्टिक कचरा इंसान के फेफड़ों में भी पाए गए हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि ये कण कोशिकाओं की कार्यप्रणाली को नुकसान पहुंचा सकते हैं और बैक्टीरिया में एंटीबायोटिक प्रतिरोध को 30 गुना तक बढ़ा सकते हैं। पहली बार अजन्मे शिशुओं के प्लेसेंटा (गर्भनाल) में माइक्रोप्लास्टिक की मौजूदगी का पता चला है, जोकि स्वास्थ्य के लिए एक बहुत बड़ा खतरा है।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें