भारत की सुरक्षा एजेंसियां दक्षिण भारत में अल-कायदा से जुड़े संगठन बेस मूवमेंट की संभावित पुनर्सक्रियता को लेकर सतर्क हो गई हैं। खुफिया इनपुट के अनुसार, 2015-16 के दौरान सक्रिय रहा यह संगठन, जिसने न्यायपालिका और पुलिस को निशाना बनाते हुए कम तीव्रता के विस्फोट किए थे, अब फिर से संगठित होने की कोशिश कर रहा है।
एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, संगठन के कई सदस्य अब भी ऑनलाइन सक्रिय हैं और खासतौर पर तमिलनाडु और कर्नाटक में दोबारा नेटवर्क खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं। हालिया संकेतों से पता चलता है कि पहले गिरफ्तारी से बच निकले सदस्य फिर से आपस में संपर्क साध रहे हैं और फिलहाल उनका फोकस ऑनलाइन प्रोपेगैंडा नेटवर्क तैयार करने पर है।
अधिकारियों का कहना है कि अभी तत्काल किसी जमीनी कार्रवाई की योजना नहीं दिख रही है। संगठन फिलहाल डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए संदेश फैलाने और लोगों को प्रभावित करने की रणनीति अपना रहा है। इसका उद्देश्य एक ओर सुरक्षा एजेंसियों की नजर से बचना है, तो दूसरी ओर धीरे-धीरे युवाओं में कट्टरता बढ़ाना भी है।
इंटेलिजेंस ब्यूरो के एक अधिकारी ने बताया कि यह गतिविधि ऐसे समय में बढ़ रही है जब दक्षिण भारत में अल-उम्माह के भी सक्रिय होने के संकेत मिल रहे हैं। 1998 के कोयंबटूर सीरियल ब्लास्ट के लिए जिम्मेदार इस संगठन के पुनर्जीवन की कोशिशें पाकिस्तान से संचालित मानी जा रही हैं। इसका मौजूदा अभियान बाबरी मस्जिद को फिर से बनाने की शपथ जैसे नारों पर केंद्रित है।