2012-2016 के बीच हमीरपुर माइनिंग साइट पर सभी तरह के नियमों की धज्जियां उड़ाई गई। नियमों के खिलाफ जाकर माइनिंग का टेंडर जारी किया गया
एनजीटी ने उक्त अवधि के दौरान कुछ समय के लिए किसी भी तरह की माइनिंग पर रोक लगा दी थी। इसके बावजूद तत्कालीन जिला मैजिस्ट, बी.चंद्रकला और उस वक्त माइनिंग महकमे की मंत्री रही गायत्री प्रजापति व दूसरे ओहदे पर बैठे लोगों ने एनजीटी के आदेशों का खुलेआम उल्लंघन किया
रोक की अवधि के दौरान अवैध तरीके से माइनिंग के टेंडर जारी हुए। न केवल नए टेंडर, बल्कि पुराने टेंडर का भी नवीनीकरण कर दिया गया। बड़े ओहदे पर बैठे लोगों के ड्राइवरों को लीज होल्डरों से फिरौती मांगने की छूट दे दी गई।
जो पैसा नहीं देता, उनकी गाड़ियों को अंदर नहीं जाने दिया गया ड्राइवरों ने जमकर उत्पात मचाया। रात के समय ये ड्राइवर अपने लोगों को किसी भी माइनिंग साइट पर भेज देते थे। वहां वे डंपर और ट्रैक्टर-ट्राली लगाकर उससे भरने लगते थे।
सीबीआई ने इस मामले में आईपीसी की धारा 120बी, 379, 384, 420 और 511 के तहत केस दर्ज किया था। पांच जनवरी को हमीरपुर, जालौन, नोएडा, कानपुर और लखनऊ में छापे मारे गए। आरोपियों के कब्जे से भारी मात्रा में सोना और नकदी बरामद की गई।
जिला मजिस्ट्रेट ने बिना ई-टेंडरिंग किए ही साइट अलॉट कर दी थी, जबकि माइनिंग का टेंडर केवल ई-टेंडरिंग प्रक्रिया के तहत अलॉट किया जाना था। प्रशासनिक अधिकारियों ने इस नियम की कोई परवाह नहीं की। मैनुअली तरीके से माइनिंग का टेंडर दे दिया गया।
दो जनवरी 2019 को सीबीआई ने जो अपराधिक मामला दर्ज किया था, उसमें बी.चंद्रकला सहित 11 आरोपियों के नाम थे। इसमें सपा और बसपा के दो नेता, कई बाबू और माइनिंग के टेंडर दिलाने वाले कथित दलाल भी शामिल थे
अवैध खनन की शिकायत जो इलाहाबाद हाईकोर्ट को मिली थी, उसमें हमीरपुर के अलावा फतेहपुर, देवरिया, शामली, कौशांबी, सहारनपुर और सिद्धार्थनगर में अवैध खनन का मामला सामने आया था।
जनवरी में आईएएस बी चंद्रकला के लखनऊ स्थित फ्लैट सहित 14 स्थानों पर छापेमारी की थी। ये छापेमारी कानपुर, लखनऊ, हमीरपुर, जालौन, नोएडा में भी हुई थी।
एक आरोपी मोइनुद्दीन के घर से 12.5 लाख कैश, 1.8 किलो सोना मिला था, समाजवादी पार्टी के एमएलसी रमेश मिश्रा, इनके भाई दिनेश कुमार मिश्रा, माइनिंग क्लर्क राम आसरे प्रजापति और अंबिका तिवारी के यहां भी छापे पड़े थे।
संजय दीक्षित पर भी केस दर्ज हुआ है। वे 2017 में बसपा के टिकट पर चुनाव लड़े थे। संजय के पिता सत्यदेव दीक्षित के घर भी छापेमारी हुई।