अखिल भारतीय संत समिति ने केंद्र सरकार से अल्पसंख्यक मंत्रालय, वक्फ बोर्ड और फिल्म सेंसर बोर्ड को समाप्त करने की मांग की है। दिल्ली में पूरे देश से आए संतों की एक उच्चस्तरीय बैठक में यह प्रस्ताव पास किया गया है कि केंद्र सरकार को इन संस्थाओं को समाप्त करना चाहिए क्योंकि (संतों की राय के मुताबिक़) ये संस्थाएं देश की बहुसंख्यक आबादी की भावनाओं का सम्मान करने में असफल रही हैं। संतों का आरोप है कि इन संस्थाओं के जरिये देश में मुस्लिम तुष्टिकरण को बढ़ावा दिया गया, देश की जमीनों पर अवैध कब्जा किया गया और सनातन धर्म की छवि खराब करने का काम किया गया।
अल्पसंख्यक मंत्रालय और वक्फ बोर्ड समाप्त हों
अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने अमर उजाला से कहा कि वर्तमान केंद्र सरकार ने हिंदुओं की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए कई अच्छे कार्य किये हैं, जिसकी वे प्रशंसा करते हैं, लेकिन इस समय देश के सामने कई गंभीर चुनौतियां हैं, जिसका समाधान खोजना बेहद आवश्यक है। यदि समय रहते इन चुनौतियों का समाधान नहीं किया गया, तो आने वाले समय में देश के सामने गंभीर संकट खड़ा हो सकता है। उन्होंने कहा कि संतों ने केंद्र सरकार से यह मांग की है कि देश से अल्पसंख्यक मंत्रालय और वक्फ बोर्ड समाप्त किया जाना चाहिए, क्योंकि इसकी आड़ में केवल मुलमानों का तुष्टिकरण किया जाता रहा है।
स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने आरोप लगाया कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सरकार के कार्यकाल के अंतिम दिनों में दिल्ली की 123 भूसंपत्तियां वक्फ बोर्ड को दान में दे दी गईं। इन संपत्तियों का बाज़ार मूल्य कई लाख करोड़ रुपये है। इस पर देश की जनता का अधिकार है, लेकिन मुस्लिम मतदाताओं को खुश करने के लिए इन जमीनों को वक्फ बोर्ड को सौंप दिया गया। उन्होंने कहा कि इसी प्रकार का मामला उत्तर प्रदेश में 1989 की कांग्रेस सरकार के द्वारा दिया गया था, जिसके अंतर्गत ग्राम सभा की जमीन को वक्फ बोर्ड को सौंप दिया जाता था।
उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक मंत्रालय और वक्फ बोर्ड के जरिये देश में भूमि जिहाद चलाया जा रहा था। आज उसके पास सेना और रेलवे के बाद तीसरी सबसे ज्यादा भूसंपत्ति है। उन्होंने कहा कि इस पर समय रहते रोक लगाना आवश्यक है। यूपी सरकार ने इस मामले में जांच के आदेश दे दिए हैं जिसको लेकर प्रश्न खड़े किये जा रहे हैं।
फिल्म सेंसर बोर्ड की जगह सनातन सेंसर बोर्ड बनाने की मांग
हाल ही की कुछ फिल्मों में हिंदू धर्म के प्रतीक चिन्हों और देवी-देवताओं के फिल्मांकन को लेकर काफी विवाद हुआ है। दर्शकों ने ऐसी फिल्मों का बायकाट कर अपना विरोध जताया है। कई फिल्मों को दर्शकों की नाराजगी के कारण भारी घाटा हुआ है। अखिल भारतीय संत समिति ने कहा है कि वर्तमान फिल्म सेंसर बोर्ड सही तरीके से अपना काम नहीं कर रहा है और इसे भंग कर दिया जाना चाहिए।
स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि फिल्म सेंसर बोर्ड अपनी जिम्मेदारी निभाने में असफल साबित हुआ है। यह इस देश में ऐसी फिल्मों के निर्माण को रोकने में असफल साबित हुआ है, जिसमें देश की सेना, बहुसंख्यक हिंदू समाज और सनातन धर्म का उपहास उड़ाया गया था। अपनी जिम्मेदारी सही तरीके से न निभाने के लिए ऐसे सेंसर बोर्ड को भंग कर दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इसके स्थान पर सनातन धर्म सेंसर बोर्ड का गठन किया जाना चाहिए जो देश की बहुसंख्यक आबादी की भावनाओं का ध्यान रखते हुए फिल्मों के प्रसारण की अनुमति दे।
उन्होंने देश की कई अन्य गंभीर समस्याओं पर भी अपने विचार प्रकट किये। स्वामी ने कहा कि देश में जनसंख्या का अप्राकृतिक तरीके से बदलाव हो रहा है, जो देश के सामने गंभीर चुनौती बनकर खड़ा हो सकता है। उन्होंने कहा कि दुनिया के कई देशों में इस तरह के उदहारण देखे जा सकते हैं, जहां आबादी में असंतुलन पैदा होने के कारण उस देश का विभाजन हो गया। उन्होंने कहा कि यदि भारत में अप्राकृतिक तरीके से जनसंख्या में बदलाव को नहीं रोका गया, तो भारत को भी इसी तरह के संकटों का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने इसके लिए सर्वोच्च न्यायालय में एक वाद भी दायर कर रखा है जिस पर सुनवाई चल रही है।
केंद्र सरकार को धन्यवाद देने का प्रस्ताव भी पारित
पीएम नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह की अगुवाई वाली वर्तमान केंद्र सरकार ने देश के बहुसंख्यक हिंदुओं की भावनाओं का सम्मान रखा है। उसने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का कानूनी रास्ता निकाला है और काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का निर्माण करवाकर हिंदू हितों की चिंता की है। उन्होंने बताया कि संतों की बैठक में इसके लिए केंद्र सरकार को धन्यवाद दिया गया है।