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एक्सप्लेनर: तीन साल में तीन बार भतीजे आकाश पर गिरी गाज, क्यों मायावती के निशाने पर हैं समधी अशोक सिद्धार्थ?

Thu, 10 Sep 2026 05:21 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र स्पेशल डेस्क, अमर उजाला

सार

बसपा सुप्रीमो मायावती ने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी से निष्कासित किया। जानिए ससुर अशोक सिद्धार्थ, समानांतर पावर सेंटर और तीन साल की अंदरूनी कलह की पूरी कहानी।
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आकाश आनंद को मायावती ने पार्टी से मुक्त किया। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बहुजन समाज पार्टी (बसपा) में उथल-पुथल का दौर लगातार जारी है। अब मायावती ने अपने उत्तराधिकारी कहे जा रहे आकाश आनंद को तीन साल के भीतर तीसरी बार राष्ट्रीय संयोजक के पद से मुक्त कर दिया। इस बार मायावती इतने पर भी नहीं रुकीं इस गुरुवार को उन्होंने आकाश को पार्टी से स्वतंत्र करने की भी घोषणा कर दी। मायावती ने आकाश की वापसी के लिए उनके ससुर और कभी बसपा से ही राज्यसभा सांसद रहे अशोक सिद्धार्थ के राजनीति से संन्यास तक की शर्त लगाई थी। जो अशोक सिद्धार्थ ने गुरुवार को पूरी भी कर दी। हालांकि, मायावती ने इसके बावजूद आकाश को पार्टी से पूरी तरह से 'मुक्त' किए जाने की बात कह दी, जिसके बाद यह कयास लगाए जा रहे हैं कि यह आकाश को बसपा से निकाले जाने का एलान है। 
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ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर बहुजन समाज पार्टी में जो अंतर्कलह और विवाद की स्थिति है, उसकी नींव कहां से पड़ी? आकाश आनंद कौन हैं? कैसे बसपा में कभी मायावती के उत्तराधिकारी बताए जाने के बावजूद पार्टी में आज भी उनकी जगह सुरक्षित नहीं है? अशोक सिद्धार्थ कौन हैं, जो आकाश के पार्टी से निकाले जाने की वजह बताए गए हैं? उनका मायावती और आकाश आनंद से रिश्ता क्या है? आइये विस्तार से जानते हैं...    

पहले जाने- बसपा में ताजा घटनाक्रम क्या हुआ?

बसपा में अंतर्कलह। - फोटो : अमर उजाला

आकाश आनंद कौन हैं?

आकाश आनंद मायावती के भतीजे हैं। आकाश के पिता आनंद कुमार भी बसपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं। आनंद कुमार पार्टी में कई अहम पदों को संभाल चुके हैं। आकाश को 2017 में मायावती ही सियासत में लेकर आई थीं। साल 2019 में उन्हें पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी मिली। 2023 में मायावती आकाश को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया। इसके बाद से चीजें कई बार बदलीं हैं। 

ये भी पढ़ें: यूपी: मायावती ने भतीजे आकाश को पार्टी से निकाला, चुनाव से पहले बसपा में संग्राम; समधी अशोक पर भी कही ये बात

आकाश आनंद। - फोटो : अमर उजाला

आकाश आनंद अर्श से फर्श पर आने की कहानी क्या है?

1. जब 'मेहनत' के लिए मिला इनाम

मायावती ने दिसंबर 2023 में आकाश आनंद को अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी घोषित किया। तब मायावती ने उन्हें उन राज्यों में संगठन को मजबूत करने का जिम्मा सौंपा था, जहां पार्टी का संगठन कमजोर रहा है। बताया जाता है कि आकाश आनंद का पार्टी में यह उभार अचानक ही नहीं हुआ था। इससे पहले उन्होंने मध्य प्रदेश-राजस्थान में जमीनी अभियान चलाए और पदयात्राएं तक निकालीं। इसी मेहनत के इनाम में उन्हें बसपा में शीर्ष तक पहुंचने में मदद मिली।

हालांकि, आकाश आनंद के लिए आगे के साल काफी मुश्किलों भरे रहे। उन्हें तीन बार बसपा से निकाला जा चुका है। 


2. फिर तीन साल में लगातार इधर-उधर हुए आकाश

पहली बार: उत्तराधिकारी व नेशनल कोऑर्डिनेटर पद से हटाया गया

कब: मई 2024 में 2024 लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान।

क्यों: सीतापुर में एक चुनावी रैली के दौरान आकाश आनंद ने सरकार के खिलाफ काफी आक्रामक बयान दिए थे, जिसके चलते उन पर आचार संहिता उल्लंघन और भड़काऊ भाषण की एफआईआर दर्ज हुई थी। इसके बाद मायावती ने उन्हें पूरी तरह परिपक्वता आने तक नेशनल कोऑर्डिनेटर और अपने राजनीतिक उत्तराधिकारी के पद से हटा दिया था। हालांकि, 47 दिनों बाद 23 जून 2024 को उन्हें दोबारा इन पदों पर बहाल कर दिया गया।
 

दूसरी बार: पार्टी से ही हो गया निष्कासन

कब: 2-3 मार्च 2025।

क्यों: मायावती ने आरोप लगाया कि आकाश आनंद अपने ससुर और पूर्व सांसद अशोक सिद्धार्थ के प्रभाव में आकर काम कर रहे हैं। अशोक सिद्धार्थ और आकाश आनंद पर पार्टी में गुटबाजी को बढ़ावा देने, राज्यों में टिकट बंटवारे और फंड जुटाने पर एकाधिकार जमाने के आरोप लगे थे।
 
मायावती का कहना था कि आकाश अपने ससुर की शह पर अपनी राजनीति और बसपा के मिशन को नुकसान पहुंचा रहे थे। हालांकि, अप्रैल 2025 में एक्स पर सार्वजनिक माफी मांगने के बाद उन्हें पार्टी में वापस लिया गया और अगस्त 2025 में मुख्य राष्ट्रीय संयोजक का पद दे दिया गया।
 

तीसरी बार: मुख्य राष्ट्रीय संयोजक पद से हटाए गए

कब: 3 सितंबर 2026।

क्यों: अगस्त 2026 में नोएडा की रैली के दौरान आकाश ने बयान दिया था कि संगठन के ढांचे में गलत लोग गलत जगह बैठे हैं, जिसे बसपा के शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ अनुशासनहीनता माना गया। इसके बाद लखनऊ में बसपा पदाधिकारियों की राष्ट्रीय बैठक में मायावती ने आकाश आनंद को आमंत्रित नहीं किया और उन्हें पदमुक्त करते हुए बयान दिया कि उन्हें अभी और राजनीतिक परिपक्वता की जरूरत है।

अब चौथी बार: पार्टी से पूरी तरह निष्कासित

कब: 10 सितंबर 2026 

क्यों: मायावती ने आकाश की वापसी के लिए शर्त रखी थी कि उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ राजनीति से पूरी तरह संन्यास लें। अशोक सिद्धार्थ ने संन्यास का एलान भी कर दिया, लेकिन मायावती ने इसे 'देर से उठाया गया कदम' बताया। मायावती ने स्पष्ट किया कि आकाश आनंद बसपा के आंदोलन से ज्यादा अपने पारिवारिक और व्यक्तिगत हितों को तवज्जो दे रहे हैं। उन्होंने यह भी मुद्दा उठाया कि जब उन्होंने ससुर से जुड़ी पोस्ट की, तो आकाश ने उसे रीपोस्ट तक नहीं किया, जो उनकी दोहरी सोच को दर्शाता है। इसके बाद उन्हें पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से पूरी तरह मुक्त कर दिया गया।

अशोक सिद्धार्थ: नेता जो समधी बने, रिश्तों पर भारी पड़ी सियासत

1. बसपा से जुड़े, सफलता की सीढ़ियां चढ़े

अशोक सिद्धार्थ बसपा के पूर्व राज्यसभा सांसद हैं और पार्टी प्रमुख मायावती के भतीजे आकाश आनंद के ससुर हैं। वे मूल रूप से उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद (कायमगंज) के रहने वाले हैं। उनका परिवार शुरुआत से ही आंबेडकरवादी आंदोलन से जुड़ा रहा। सियासत में आने से पहले उन्होंने नेत्र विज्ञान (ऑप्टोमेट्री) में डिप्लोमा किया और यूपी के स्वास्थ्य विभाग में सरकारी नौकरी की। एक सरकारी कर्मचारी से लेकर बसपा के कद्दावर नेता और फिर पार्टी से निष्कासित होकर राजनीति से संन्यास लेने तक की उनकी कहानी भी काफी दिलचस्प रही है। 

बताया जाता है कि वे 2000 के दशक की शुरुआत में अखिल भारतीय पिछड़ा और अल्पसंख्यक कर्मचारी संघ (BAMCEF) के फर्रुखाबाद जिला संयोजक बने। यहां से वे मायावती के संपर्क में आए। मायावती की सलाह पर उन्होंने अपनी सरकारी नौकरी छोड़ दी और बसपा के कार्यकर्ता बन गए।

अशोक सिद्धार्थ। - फोटो : अमर उजाला
अशोक सिद्धार्थ की बसपा में बढ़ती सियासी साख का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्हें दक्षिण भारत के राज्यों- तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश के अलावा महाराष्ट्र और दिल्ली का संगठन प्रभारी बनाकर बड़ी जिम्मेदारियां सौंपी गईं।


2. पारिवारिक रिश्ता जुड़ा, 'समधी' का दर्जा मिला

  • मार्च 2023 में अशोक सिद्धार्थ की डॉक्टर बेटी प्रज्ञा सिद्धार्थ का विवाह मायावती के भतीजे और घोषित उत्तराधिकारी आकाश आनंद से हुआ। 
  • इस रिश्ते के बाद बसपा संगठन में अशोक सिद्धार्थ का प्रभाव और दबदबा काफी बढ़ गया। उनका पार्टी के कामकाज में दखल भी बढ़ा।

आकाश आनंद के ससुर हैं अशोक सिद्धार्थ। - फोटो : अमर उजाला

3. फिर रिश्तों पर भारी पड़ी सियासी महत्वाकांक्षा?

मायावती से पारिवारिक रिश्ता जुड़ने के बाद बसपा के कामकाज में अशोक सिद्धार्थ का दखल काफी बढ़ गया। बताया जाता है कि बसपा के पुराने वफादार नेताओं ने मायावती से शिकायत की कि अशोक सिद्धार्थ दामाद आकाश आनंद के साथ मिलकर पार्टी में अलग गुटबाजी चला रहे हैं। 
 

4. कैसे पार्टी से निष्कासन और फिर संन्यास तक आ गई कहानी

पहली बार: दिल्ली चुनाव के बाद हुआ निष्कासन

कब: फरवरी 2025

क्यों: अशोक सिद्धार्थ पर पार्टी में गुटबाजी को बढ़ावा देने और पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप लगे। खुद बसपा सुप्रीमो मायावती ने उन्हें निकालने से पहले कहा कि अशोक अपने दामाद आकाश आनंद के राजनीतिक करियर को प्रभावित कर रहे हैं।


इतना ही नहीं अशोक सिद्धार्थ पर हरियाणा, दिल्ली चुनाव में मनमानी करने और उम्मीदवारों के टिकट बंटवारे में हाईकमान को गुमराह करने के आरोप लगे। यह भी कहा गया कि वे बसपा के फंड जुटाने की प्रक्रिया को अनधिकृत रूप से नियंत्रित कर रहे थे और उनका गुट पार्टी हाईकमान के फैसलों के खिलाफ खुले तौर पर बयानबाजी कर रहा था। एक तरह से उन पर बसपा में ही आकाश की मदद से एक समानांतर पावर सेंटर खड़ा करने का आरोप लगा। इसके बाद मायावती ने सख्ती दिखाते हुए उन्हें पार्टी से बाहर कर दिया। 

हालांकि, सोशल मीडिया पर सार्वजनिक रूप से अपनी गलतियों के लिए मायावती से माफी मांगने और भविष्य में अनुशासित रहने के वादे के बाद सितंबर 2025 में उनका निष्कासन रद्द कर दिया गया।

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दूसरी बार: पार्टी से फिर हुआ निष्कासन

कब: 3 अगस्त 2026

क्यों: मायावती ने उन पर बार-बार पार्टी अनुशासन का उल्लंघन करने और संगठन से जुड़े निर्देशों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। इसके अलावा, दिल्ली, कर्नाटक, ओडिशा और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में दी गई संगठनात्मक जिम्मेदारियों को प्रभावी ढंग से न निभाने के वजह बताते हुए उन्हें पार्टी से दूसरी बार बाहर कर दिया गया।


तीसरी बार: राजनीति से संन्यास की ही लग गई शर्त

कब: 9-10 सितंबर 2026

क्यों: मायावती ने शर्त रखी थी कि अशोक सिद्धार्थ के राजनीति से पूरी तरह संन्यास लेने पर ही आकाश आनंद की पार्टी में वापसी पर विचार किया जा सकता है। इसके बाद अशोक सिद्धार्थ ने एक भावुक बयान जारी कर राजनीति और सार्वजनिक जीवन से संन्यास का एलान कर दिया। हालांकि, इसके बावजूद मायावती ने आकाश आनंद को भी बसपा से निष्कासित करने का फैसला किया है।
 
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