कोरोना काल और लॉकडाउन की पाबंदियों ने तमाम क्षेत्र के लोगों के अलावा कलाकारों के लिए भी खासी मुश्किल पैदा कर दी है। लेकिन अब धीरे-धीरे स्थितियों को सामान्य करने और कलाकारों के भीतर आत्मविश्वास भरने की कोशिशें भी शुरू हो रही हैं। करीब छह महीने के बाद पहली बार ललित कला अकादमी ने दिल्ली में कलाकारों के लिए एक कला कार्यशाला का आयोजन किया। डिजिटल माध्यमों से बाहर निकल कर अकादमी ने दिल्ली के गढ़ी स्थित अपने क्षेत्रीय केद्र में गांधी जी के कामकाज पर केन्द्रित करते हुए दो दिनों तक करीब 75 कलाकारों को खुद को अभिव्यक्त करने का मौका दिया।
वैसे तो जब से लॉकडाउन हुआ है, तभी से अलग अलग मंचों पर कलाकार खुद को डिजिटल तौर तरीकों से अभिव्यक्त करने की कोशिश करते रहे हैं, लेकिन डिजिटल माध्यम की अपनी सीमा है और कला को आप जब तक सामने से नहीं देखते उसकी गहराइयों को नहीं समझ सकते। दूसरे, पिछले छह महीनों से डिजिटल माध्यमों पर कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देकर और कलाकार अपनी पेंटिंग और कला को चंद जानने वाले लोगों को दिखाकर थक चुके हैं। उन्हें बाहर निकलने के मौके की तलाश है। ललित कला अकादमी के अध्यक्ष उत्तम पचारणे बताते हैं कि वो लगातार मंत्रालय से बात कर रहे हैं और कलाकारों के लिए आर्थिक मदद के साथ उनके लिए नए रास्ते खोलने की कोशिशों में लगे हैं।
ललित कला अकादमी की इस कार्यशाला के उद्घाटन के मौके पर जाने माने कलाकार दत्तात्रेय आप्टे और अमिताव भौमिक ने भी हिस्सा लिया और कहा कि अकादमी का मकसद यही होना चाहिए कि वह संकट के मौके पर कलाकारों के साथ खड़ा हो और उन्हें नए मौके दे, उनके भीतर आत्मविश्वास पैदा करे। अकादमी की यह कोशिश बेशक आने वाले वक्त में अन्य संस्थानों को भी कुछ कारगर और रचनात्मक करने की प्रेरणा देगी।
दूसरी तरफ नेशनल गैलरी ऑफ मॉडर्न आर्ट भी जयपुर हाउस को सजाने संवारने में लगा है, ताकि आने वाले दिनों में यहां भी कलाकारों की गतिविधियां पहले की तरह शुरू हो सकें। एनजीएमए के महानिदेशक और जाने-माने कलाकार अद्वैत गणनायक कलाकारों की स्थिति से चिंतित हैं और कहते हैं उन्हें फिर से मुख्य धारा में लाने और उनके भीतर भरती जा रही निराशा को हटाने की कोशिश की जा रही है। अभी तक वर्चुअल गैलरी के जरिये लोगों को जोड़ने की कोशिश हो रही थी, अब कलाकारों को फिर से गैलरी में बुलाने के लिए कार्ययोजना बनाई जा रही है।