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Ajmer Sharif Controversy: अजमेर शरीफ के खादिम ने कहा- छुटभैये हिंदूवादी संगठनों पर सरकार का कोई नियंत्रण नहीं

सार

Ajmer Sharif Controversy: अजमेर शरीफ के खादिम सईद सरवर चिश्ती ने कहा कि यह देश संविधान से चलता है और इसी देश के संविधान में प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट है। उसके अंतर्गत अब जगह-जगह के धार्मिक स्थलों के बारे में ऐसे विवाद नहीं खड़े किए जा सकते। यदि इस कानून के रहते हुए यह हो रहा है तो गलत है। यदि सरकार ऐसे मुद्दे उठवाना चाहती है तो उसे सबसे पहले वर्शिप ऑफ प्लेसेज एक्ट समाप्त कर देना चाहिए।
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अजमेर शरीफ दरगाह - फोटो : ANI
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विस्तार
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अजमेर शरीफ के खादिम सईद सरवर चिश्ती ने दावा किया है कि अजमेर शरीफ हमेशा से एक दरगाह रही है। लेकिन समाज में सांप्रदायिक विभाजन को बढ़ावा देने के लिए कुछ लोग समय-समय पर इस तरह के विवाद उठाते रहते हैं। ऐसे लोगों ने अदालत को भी एक हथियार बना लिया है और अब अदालत के जरिए वे अपने इरादों को पूरा करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को ऐसे लोगों को अपने इरादों में सफल नहीं होने देना चाहिए।
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'छोटे संगठन केवल चर्चा में रहने करते हैं ऐसी हरकतें'
सईद सरवर चिश्ती ने अमर उजाला से विशेष बातचीत के दौरान कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के नेता मोहन भागवत ने स्पष्ट कह दिया है कि अयोध्या के हासिल हो जाने के बाद हिंदू समाज को धैर्य का परिचय देना चाहिए और उन्हें हर मस्जिद के अंदर शिवलिंग की तलाश नहीं करनी चाहिए, स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी यही बात कह रहे हैं, लेकिन इसके बाद भी स्वयं को हिंदूवादी संगठन होने का दावा करने वाले छोटे-छोटे संगठन केवल चर्चा में रहने के लिए इस तरह की हरकतें करते हैं। लेकिन इससे सामाजिक एकता को बड़ा धक्का लगता है। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि अब ये संगठन और इससे जुड़े लोगों पर सरकार का कोई नियंत्रण नहीं रह गया है।        

चिश्ती ने कहा कि यह देश संविधान से चलता है और इसी देश के संविधान में प्लेसेज ऑफ वर्शिप ऐक्ट है। उसके अंतर्गत अब जगह-जगह के धार्मिक स्थलों के बारे में ऐसे विवाद नहीं खड़े किए जा सकते। यदि इस कानून के रहते हुए यह हो रहा है तो गलत है। यदि सरकार ऐसे मुद्दे उठवाना चाहती है तो उसे सबसे पहले वर्शिप ऑफ प्लेसेज एक्ट समाप्त कर देना चाहिए। 
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क्या अजमेर शरीफ का सर्वे करने की अनुमति मिलनी चाहिए? 
अमर उजाला के इस प्रश्न पर अजमेर शरीफ के खादिम सईद सरवर चिश्ती ने कहा कि अजमेर शरीफ के दरगाह होने पर कभी कोई विवाद नहीं रहा है। आठ सौ सालों से यहां हिंदू-मुसलमान सभी अपनी मन्नत पूरी कराने के लिए आते रहे हैं। यह पूरा विवाद हर विलास शारदा की लिखी केवल एक पुस्तक के आधार पर खड़ा किया जा रहा है, लेकिन सबको यह पता होना चाहिए कि पुस्तक के लेखक हिंदू महासभा से जुड़े रहे हैं और उनका एजेंडा सबकी जानकारी में है। ऐसे में अजमेर शरीफ का विवाद पैदा कर सामाजिक एकता को तोड़ने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए।  

ज्ञानवापी से शुरू हुई गलत परंपरा- सईद सरवर चिश्ती
चिश्ती का दावा है कि वाराणसी में ज्ञानवापी का सर्वे कराने की अनुमति देकर एक गलत परंपरा को स्थापित किया गया है। उसके बाद से ही सभी को यह रास्ता मिल गया है कि जो चाहे अपने आसपास की मस्जिदों पर इस तरह का दावा ठोंक दे रहा है। लेकिन मनमानी तरीके से सर्वे करने का आदेश देने से जिस तरह संभल में स्थिति खराब हुई, ऐसी स्थिति दूसरी जगहों पर न आए, इसके लिए सबको शांति से काम लेना चाहिए और जगह-जगह विवाद नहीं पैदा करना चाहिए।  
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