देवेंद्र फडणवीस (फाइल)
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दरअसल, बुधवार की शाम बोम्मई ने ट्वीट किया, महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कर्नाटक-महाराष्ट्र सीमा मुद्दे पर 'भड़काऊ' बयान दिया है और उनका सपना कभी पूरा नहीं होगा। हमारी सरकार देश की भूमि, पानी और सीमाओं को बचाने के लिए प्रतिबद्ध है।
फडणवीस ने कहा था कि महाराष्ट्र का कोई भी गांव कर्नाटक में नहीं जाएगा। उन्होंने ट्वीट कर कहा था कि बेलगाम-करवार-निपानी समेत मराठी भाषी गांवों को पाने के लिए राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट में मजबूती से लड़ाई लड़ेगी।
इस मुद्द पर प्रतिक्रिया देते हुए पवार ने कहा, सागली जिले में जाट तालुका के गांवों पर दावा करने के बाद कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने अब अक्कलकोट और सोलापुर पर भी दावा किया है। मैं कर्नाटक के मुख्यमंत्री के बयान की कड़ी निंदा करता हूं।
पवार ने आगे कहा, हमारे मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उप-मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को कड़ा जवाब देना चाहिए। केंद्र को तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए। मामला अदालत में लंबित है। यह लोगों का महंगाई, बेरोजगारी जैसे मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए है।
इससे पहले कर्नाटक के मुख्यमंत्री बोम्मई ने कहा था कि सीमा रेखा महाराष्ट्र में राजनीतिक उपकरण (पॉलिटीकल टूल) बन गई है और सत्ता में रहने के लिए कोई भी पार्टी राजनीतिक उद्देश्यों के लिए इस मुद्दे को उठाएगी। बोम्मई ने कहा था कि मेरी सरकार कर्नाटक की सीमाओं की रक्षा करने में सक्षम है और उसने कदम भी उठाए हैं।
बोम्मई ने दावा किया कि महाराष्ट्र के सांगली जिले कुछ गांवों ने कर्नाटक के साथ विलय की मांग करते हुए एक प्रस्ताव को पारित किया है। ये गांव पानी के संकट से जूझ रहे हैं। हालांकि, महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री ने इन दावों का खंडन किया और कहा कि ऐसे किसी गांव ने हाल के दिनों में कर्नाटक के साथ विलय की मांग नहीं की है।