महाराष्ट्र की राजनीति के दिग्गज नेता अजित पवार को पिछले 13 वर्षों में छठवीं बार उप मुख्यमंत्री बनने का अवसर मिला। वह महाराष्ट्र के सबसे लंबे समय तक गैर-लगातार उप मुख्यमंत्री रहने वाले नेता भी रहे। उनका बुधवार को प्लेन हादसे में 66 वर्ष की उम्र में निधन हो गया।
वह दिसंबर 2024 से देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में एकनाथ शिंदे के साथ महाराष्ट्र के 8वें उप मुख्यमंत्री के रूप में कार्यरत रहें। महाराष्ट्र की राजनीति में 23 नवंबर 2019 का दिन इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया, जिस दिन अजित पवार ने देवेंद्र फडणवीस के साथ उप मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, लेकिन यह सरकार सिर्फ एक दिन में गिर गई।
अजित अनंतराव पवार का जन्म 22 जुलाई 1959 को महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले में हुआ। वह एनसीपी प्रमुख शरद पवार के बड़े भाई अनंतराव पवार के बेटे हैं। उनके पिता वी. शांताराम के राजकमल स्टूडियो में काम करते थे। अजित पवार ने अपने चाचा शरद पवार के राजनीतिक नक्शेकदम पर चलते हुए राजनीति में प्रवेश किया। जनता और समर्थकों के बीच वह ‘दादा’ के नाम से लोकप्रिय हैं। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा देओली प्रवर से की और माध्यमिक शिक्षा महाराष्ट्र शिक्षा बोर्ड से पूरी की। उनकी शिक्षा माध्यमिक स्तर तक ही रही।
अजित पवार ने राजनीति की शुरुआत 1982 में की, जब वह मात्र 20 वर्ष के थे। उन्होंने सबसे पहले एक चीनी सहकारी संस्था का चुनाव लड़ा।
उन्होंने कृषि, बागवानी, बिजली और जल संसाधन मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों पर काम किया। जल संसाधन मंत्री के रूप में उन्होंने कृष्णा घाटी और कोकण सिंचाई परियोजनाओं की जिम्मेदारी संभाली।
अजित पवार को महाराष्ट्र की राजनीति में महत्वाकांक्षी और प्रभावशाली नेता माना जाता है। 2009 के विधानसभा चुनाव के बाद उन्होंने उप मुख्यमंत्री बनने की इच्छा जताई थी, लेकिन उस समय यह पद छगन भुजबल को मिला। हालांकि, दिसंबर 2010 में वह पहली बार उप मुख्यमंत्री बने। 2013 में उनका नाम सिंचाई घोटाले से जुड़े विवाद में आया और उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। बाद में उन्हें क्लीन चिट मिली और वह फिर से पद पर लौटे।
हालांकि, इन विवादों के बावजूद अजित पवार महाराष्ट्र की राजनीति में एनसीपी के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते रहे।
अजित पवार को एक मजबूत संगठनकर्ता और प्रशासनिक अनुभव वाले नेता के रूप में देखा जाता रहा। उनके और चाचा शरद पवार के बीच राजनीतिक मतभेदों की चर्चा भी होती रही है, लेकिन उन्होंने हमेशा खुद को शरद पवार का अनुयायी बताया है। आज अजित पवार महाराष्ट्र की सत्ता राजनीति के सबसे अहम चेहरों में शामिल रहे और राज्य की राजनीति में उनकी भूमिका निर्णायक मानी जाती था।