महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री और एनसीपी नेता अजित पवार का विमान दुर्घटना में निधन हो गया है। ये हादसा उस वक्त हुआ जब अजित पवार को ले जा रहा विमान बारामती में लैंडिंग करने जा रहा था। अक्सर विमान हादसे टेक ऑफ और लैंडिंग के दौरान ही होते हैं, क्योंकि उड़ान के ये दोनों चरण सबसे ज्यादा संवेदनशील माने जाते हैं। इस वक्त विमान कम ऊंचाई पर होता है और पायलट को बेहद कम समय में कई अहम फैसले लेने पड़ते हैं। टेकऑफ के दौरान इंजन की पूरी क्षमता पर निर्भरता रहती है, जबकि लैंडिंग के समय गति, संतुलन, रनवे की स्थिति और मौसम बड़ी भूमिका निभाते हैं। किसी भी तरह की तकनीकी खराबी, खराब मौसम या मानवीय चूक इन चरणों में हादसे की आशंका बढ़ा देती है। इसी वजह से विमानन विशेषज्ञ टेक ऑफ और लैंडिंग को फ्लाइट का सबसे क्रिटिकल फेज मानते हैं।
इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स की एविएशन एंड टूरिज्म एक्सपर्ट कमेटी के चेयरमैन डॉ.सुभाष गोयल ने अमर उजाला डिजिटल से चर्चा में कहा, किसी विमान को सुरक्षित तरीके से उड़ाने के लिए केवल तकनीकी ज्ञान ही नहीं, बल्कि लंबी और गहन ट्रेनिंग, विमान के मैकेनिकल सिस्टम की गहरी समझ और हाथों व आंखों के बेहतर तालमेल की भी जरूरत होती है। इसके साथ ही पायलटों को हर स्थिति में तेज और सटीक फैसले लेने की क्षमता रखनी पड़ती है। सुरक्षित उड़ान के लिए पायलटों को केवल मौजूदा हालात ही नहीं, बल्कि आगे आने वाली परिस्थितियों का भी अनुमान लगाना होता है। इसमें उड़ान से पहले रूट की प्लानिंग, मौसम की सटीक जांच, संभावित बदलावों का आकलन और आपात स्थितियों के लिए तैयारी शामिल होती है। यही सभी पहलू एक जिम्मेदार और सुरक्षित पायलट की पहचान होते हैं। कोई भी एयरक्राफ्ट तकनीकी टीम की मंजूरी मिलने के बाद ही उड़ान भरता है। इसमें मौसम से लेकर तमाम प्रकार की मंजूरी शामिल होती है। लेकिन एयरक्राफ्ट क्रैश की घटना अचानक होने के कई कारण होते है। इनमें एकदम से मौसम में गड़बड़ी होना, एयरक्राफ्ट से किसी पक्षी का टकरा जाना और और कोई बड़ी तकनीकी गड़बड़ी शामिल होती है।
विमान हादसों पर नजर रखने वाली संस्था एविएशन सेफ्टी नेटवर्क के आंकड़े बताते हैं कि बीते कुछ वर्षों में हवाई यात्रा के दौरान दुर्घटनाओं की संख्या चिंता का विषय रही है। वर्ष 2017 से 2023 के बीच दुनियाभर में कुल 813 विमान हादसे दर्ज किए गए, जिनमें 1,473 यात्रियों की जान चली गई। आंकड़ों के मुताबिक, विमान दुर्घटनाओं का सबसे ज्यादा खतरा लैंडिंग के दौरान रहता है। इन सात वर्षों में लैंडिंग के समय 261 हादसे हुए। इसके बाद उड़ान भरने या उड़ान के दौरान कुल 212 दुर्घटनाएं दर्ज की गईं।
विमान के भीतर मौजूद ज्वलनशील पदार्थ भी आग लगने की बड़ी वजह बनते हैं। विमानन ईंधन, हाइड्रोलिक ऑयल और अन्य केमिकल्स अत्यधिक ज्वलनशील होते हैं, जो दुर्घटना की स्थिति में बेहद तेजी से आग पकड़ लेते हैं। विमान क्रैश होते ही ईंधन टैंक के फटने की आशंका बढ़ जाती है। टैंकों से बाहर निकलने वाला ईंधन चंद सेकंड में आग के गोले में तब्दील हो जाता है, जिससे आग तेजी से फैलती है और हालात और भी भयावह हो जाते हैं। यही कारण है कि विमान हादसों में आग लगने के मामले अक्सर जानलेवा साबित होते हैं।