अजित पवार प्लेन क्रैश मामले में जांच को नया मोड़ मिला है। रोहित पवार द्वारा दर्ज जीरो एफआईआर को महाराष्ट्र सीआईडी ने अपनी जांच में शामिल कर लिया है। यह एफआईआर अब बयान के रूप में जांच का हिस्सा बनेगी। हादसे में पांच लोगों की मौत हुई थी। अलग से एएआईबी भी जांच कर रहा है।
महाराष्ट्र की राजनीति और सुरक्षा तंत्र को झकझोर देने वाले प्लेन हादसे में अब जांच ने नया मोड़ ले लिया है। 28 जनवरी को हुए इस हादसे में तत्कालीन उपमुख्यमंत्री अजित पवार समेत पांच लोगों की मौत हो गई थी। अब इस मामले में दर्ज जीरो एफाईआर को भी जांच में शामिल किया गया है, जिससे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है।
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पुणे में अधिकारियों ने बताया कि एनसीपी (एसपी) विधायक रोहित द्वारा दर्ज जीरो एफआईआर को महाराष्ट्र सीआईडी ने अपनी जांच में शामिल कर लिया है। यह FIR बंगलूरू में दर्ज कराई गई थी, जिसे बाद में पुणे के बारामती पुलिस स्टेशन और फिर सीआईडी को भेजा गया।
क्या है जीरो एफआईआर और क्यों दर्ज हुई?
जीरो एफआईआर वह रिपोर्ट होती है जो किसी भी थाने में दर्ज की जा सकती है, चाहे घटना उस क्षेत्र में हुई हो या नहीं। रोहित पवार ने दावा किया था कि महाराष्ट्र में उनकी शिकायत दर्ज नहीं की गई, इसलिए उन्होंने कर्नाटक में जाकर एफआईआर दर्ज कराई।
सीआईडी जांच में क्या बदलाव आया?
महाराष्ट्र सीआईडी प्रमुख सुनील रामानंद ने बताया कि इस जीरो एफआईआर को अब जांच का हिस्सा बनाया गया है। इसे भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 180 के तहत बयान के रूप में लिया जाएगा और जांच में शामिल किया जाएगा।
हादसा कैसे हुआ था?
28 जनवरी को एक लियरजेट-45 विमान, जो मुंबई से बारामती जा रहा था, बारामती एयरपोर्ट पर क्रैश हो गया। इस हादसे में अजित पवार और चार अन्य लोगों की मौत हो गई थी। घटना के बाद पुणे ग्रामीण पुलिस ने आकस्मिक मृत्यु रिपोर्ट दर्ज की थी।
क्या अन्य एजेंसियां भी जांच कर रही हैं?
इस मामले में नागरिक उड्डयन मंत्रालय के तहत एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो भी अलग से जांच कर रहा है। उसने 28 फरवरी को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट जमा की थी। इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब सीआईडी जांच में नया एंगल जुड़ गया है। जीरो एफआईआर के शामिल होने से उम्मीद है कि हादसे की असली वजहों तक पहुंचने में मदद मिलेगी और जिम्मेदारी तय हो सकेगी।