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NCP: एनसीपी विधायकों की अयोग्यता पर हुई सुनवाई; जयंत पाटिल के महाराष्ट्र अध्यक्ष बनने पर खड़े हुए सवाल

Thu, 25 Jan 2024 05:21 AM IST
यशोधन शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर के समक्ष अयोग्यता याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के अजीत पवार गुट द्वारा यह टिप्पणी की गई। शरद पवार गुट के पाटिल ने कहा कि वह राज्य राकांपा अध्यक्ष हैं, क्योंकि वह इस पद के लिए चुने गए थे।
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NCP AJIT PAWAR - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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अजीत पवार द्वारा एनसीपी में दोफाड़ करने के बाद शुरू हुआ विवाद अभी सुलझा नहीं है। इसी क्रम में एनसीपी विधायकों की अयोग्यता को लेकर विधानसभा राहुल नार्वेकर के सामने बुधवार को सुनवाई हुई। इस दौरान एनसीपी के शरद गुट के नेता जयंत पाटिल और सांसद अमोल कोल्हे के बयान दर्ज किए गए। सुनवाई के दौरान एनसीपी के अजित धड़े ने पार्टी की संगठनात्मक चुनाव प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए।

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अजित धड़े ने कहा कि जयंत पाटिल एनसीपी की महाराष्ट्र इकाई के मनोनीत अध्यक्ष थे। उन्हें निर्वाचित तरीके से यह पद नहीं दिया गया था। अजीत पवार गुट के वकीलों ने कहा कि राज्य राकांपा अध्यक्ष के रूप में पाटिल का कार्यकाल 2022 में समाप्त हो गया था। इस पर शरद पवार गुट के नेता और पूर्व मंत्री जयंत पाटिल ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि वह अभी भी एनसीपी की महाराष्ट्र इकाई के अध्यक्ष हैं।

जयंत पाटिल ने दावा किया कि उन्हें यह पद निर्वाचित तरीके से तीस साल के लिए दिया गया था। ऐसे में नई नियुक्ति तक वे ही इस पद पर बने रहेंगे। इतना ही नहीं, जयंत पाटिल ने एक और खुलासा भी किया। उन्होंने बताया कि पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल ने उन्हें एक पत्र द्वारा चुने जाने की जानकारी दी थी।
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गौरतलब है कि वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल इस समय अजित पवार गुट में हैं। अयोग्यता से संबंधित याचिकाओं पर पाटिल से 90 सवाल पूछे गए। वहीं, शिरूर से लोकसभा सांसद अमोल कोल्हे से भी जिरह की गई।

शिंदे सरकार में शामिल हुए थे अजित पवार  
नवंबर 2019 में महा विकास अघाड़ी (एमवीए) की सरकार बनी थी। इसके घटक दल राकांपा, शिवसेना और कांग्रेस थे। लेकिन, 2022 में एकनाथ शिंदे की बगावत के बाद यह सरकार गिर गई। उसके बाद शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना और भाजपा की सरकार राज्य की सत्ता में आई। फिर राकांपा के अजित पवार और आठ विधायक भी पिछले साल जुलाई में सरकार में शामिल हो गए। इसके बाद राकांपा दो धड़ों में बंट गई। तबसे दोनों धड़े पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर दावा कर रहे हैं। दोनों गुट विधानसभा अध्यक्ष से मांग कर रहे हैं कि दूसरे पक्ष के प्रति निष्ठा रखने वाले विधायकों को अयोग्य घोषित किया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने एनसीपी अयोग्यता मामले में स्पीकर राहुल नार्वेकर को फैसला देने के लिए 31 जनवरी तक समय दिया है। गौरतलब है कि राकांपा की स्थापना साल 1999 में शरद पवार ने की थी। पार्टी 2014 तक राज्य में कांग्रेस की नेतृत्व वाली सरकार का हिस्सा बनी रही।

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